Love Poetry (page 53)
रात गुज़री कि शब-ए-वस्ल का पैग़ाम मिला
हसन नईम
क़सीदा तुझ से ग़ज़ल तुझ से मर्सिया तुझ से
हसन नईम
क़ल्ब-ओ-जाँ में हुस्न की गहराइयाँ रह जाएँगी
हसन नईम
पैकर-ए-नाज़ पे जब मौज-ए-हया चलती थी
हसन नईम
न मेरे ख़्वाब को पैकर न ख़द्द-ओ-ख़ाल दिया
हसन नईम
मुझ को कोई भी सिला मिलने में दुश्वारी न थी
हसन नईम
माल-ओ-मता-ए-दश्त सराबों को दे दिया
हसन नईम
मैं किस वरक़ को छुपाऊँ दिखाऊँ कौन सा बाब
हसन नईम
मैं जनम जनम का अनीस हूँ किसी तौर दिल में बसा मुझे
हसन नईम
मैं ग़ज़ल का हर्फ़-ए-इम्काँ मसनवी का ख़्वाब हूँ
हसन नईम
कुछ उसूलों का नशा था कुछ मुक़द्दस ख़्वाब थे
हसन नईम
कोह के सीने से आब-ए-आतशीं लाता कोई
हसन नईम
ख़्वाब ठहरा सर-ए-मंज़िल न तह-ए-बाम कभी
हसन नईम
ख़्वाब की राह में आए न दर-ओ-बाम कभी
हसन नईम
ख़ुर्शीद की निगाह से शबनम को आस क्या
हसन नईम
ख़ैर से दिल को तिरी याद से कुछ काम तो है
हसन नईम
करें न याद वो शब हादिसा हुआ सो हुआ
हसन नईम
करें न याद शब-ए-हादिसा हुआ सो हुआ
हसन नईम
जो ग़म के शो'लों से बुझ गए थे हम उन के दाग़ों का हार लाए
हसन नईम
जंगलों की ये मुहिम है रख़्त-ए-जाँ कोई नहीं
हसन नईम
जादू-ए-ख़्वाब में कुछ ऐसे गिरफ़्तार हुए
हसन नईम
जब्र-ए-शही का सिर्फ़ बग़ावत इलाज है
हसन नईम
इश्क़ के बाब में किरदार हूँ दीवाने का
हसन नईम
हुस्न के सेहर ओ करामात से जी डरता है
हसन नईम
एक भी हर्फ़ न था ख़ुश-ख़बरी का लिक्खा
हसन नईम
दिल में हो आस तो हर काम सँभल सकता है
हसन नईम
चेहरे पे मोहर-ए-ग़म है ख़त-ओ-ख़ाल की तरह
हसन नईम
चेहरे पे मोहर-ए-ग़म है ख़त-ओ-ख़ाल की तरह
हसन नईम
बिछ्ड़ें तो शहर भर में किसी को पता न हो
हसन नईम
बयान-ए-शौक़ बना हर्फ़-ए-इज़्तिराब बना
हसन नईम