Love Poetry (page 52)
कभी आबाद करता है कभी बरबाद करता है
हसन रिज़वी
हवा के रुख़ पर चराग़-ए-उल्फ़त की लौ बढ़ा कर चला गया है
हसन रिज़वी
गई रुतों को भी याद रखना नई रुतों के भी बाब पढ़ना
हसन रिज़वी
चुप हैं हुज़ूर मुझ से कोई बात हो गई
हसन रिज़वी
अनीस-ए-जाँ हैं अभी तक निशानियाँ उस की
हसन रिज़वी
अब के यारो बरखा-रुत ने मंज़र क्या दिखलाए हैं
हसन रिज़वी
ज़िंदगी ग़मगीन होती जा रही है
हसन निज़ामी
तल्ख़ियाँ रह जाएँगी लफ़्ज-ए-वफ़ा रह जाएगा
हसन निज़ामी
तय मुझ से ज़िंदगी का कहाँ फ़ासला हुआ
हसन निज़ामी
सूखे हुए दरख़्त के पत्तों को देखना
हसन निज़ामी
शाख़ से फूल को फिर जुदा कर दिया
हसन निज़ामी
पहले नज़्र लब-ओ-रुख़्सार करेगी दुनिया
हसन निज़ामी
मैं घर से ज़ेहन में कुछ सोचता निकल आया
हसन निज़ामी
जुदाई भी क़राबत की तरह थी
हसन निज़ामी
मैं अपनी रूह में उस को बसा चुका इतना
हसन नईम
कोई मौसम हो यही सोच के जी लेते हैं
हसन नईम
ख़ैर से दिल को तिरी याद से कुछ काम तो है
हसन नईम
जो मेरे दश्त-ए-जुनूँ में था फ़र्क़-ए-रू-ए-बहार
हसन नईम
तशवीश
हसन नईम
निदा-ए-तख़्लीक़
हसन नईम
ख़ेमा-ए-याद
हसन नईम
एक दरख़्त एक तारीख़
हसन नईम
यही तो ग़म है वो शाइ'र न वो सियाना था
हसन नईम
याद का फूल सर-ए-शाम खिला तो होगा
हसन नईम
वो कज-निगाह न वो कज-शिआ'र है तन्हा
हसन नईम
वो जो दर्द था तिरे इश्क़ का वही हर्फ़ हर्फ़-ए-सुख़न में है
हसन नईम
उसी ख़ुश-नवा में हैं सब हुनर मुझे पहले था न क़यास भी
हसन नईम
उम्मीद ओ यास ने क्या क्या न गुल खिलाए हैं
हसन नईम
सुब्ह-ए-तरब तो मस्त-ओ-ग़ज़ल-ख़्वाँ गुज़र गई
हसन नईम
रश्क अपनों को यही है हम ने जो चाहा मिला
हसन नईम