Sad Poetry (page 138)
यूँ सजा चाँद कि झलका तिरे अंदाज़ का रंग
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
यूँ बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये मौसम-ए-गुल गरचे तरब-ख़ेज़ बहुत है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
यक-ब-यक शोरिश-ए-फ़ुग़ाँ की तरह
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
याद-ए-ग़ज़ाल-चश्माँ ज़िक्र-ए-समन-अज़ाराँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो अहद-ए-ग़म की काहिश-हा-ए-बे-हासिल को क्या समझे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तिरी उमीद तिरा इंतिज़ार जब से है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शरह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शैख़ साहब से रस्म-ओ-राह न की
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारा-ए-शाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सहल यूँ राह-ए-ज़िंदगी की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सभी कुछ है तेरा दिया हुआ सभी राहतें सभी कुल्फ़तें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
राज़-ए-उल्फ़त छुपा के देख लिया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
क़ंद-ए-दहन कुछ इस से ज़ियादा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर लौटा है ख़ुर्शीद-ए-जहाँ-ताब सफ़र से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़