Sad Poetry (page 139)
कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ मोहतसिबों की ख़ल्वत में कुछ वाइ'ज़ के घर जाती है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कुछ दिन से इंतिज़ार-ए-सवाल-ए-दिगर में है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किस हर्फ़ पे तू ने गोश-ए-लब ऐ जान-ए-जहाँ ग़म्माज़ किया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब याद में तेरा साथ नहीं कब हात में तेरा हात नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब तक दिल की ख़ैर मनाएँ कब तक रह दिखलाओगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जमेगी कैसे बिसात-ए-याराँ कि शीशा ओ जाम बुझ गए हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ मिन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इज्ज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हुस्न मरहून-ए-जोश-ए-बादा-ए-नाज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम ने सब शेर में सँवारे थे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हसरत-ए-दीद में गुज़राँ हैं ज़माने कब से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हमीं से अपनी नवा हम-कलाम होती रही
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हैराँ है जबीं आज किधर सज्दा रवा है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गिरानी-ए-शब-ए-हिज्राँ दो-चंद क्या करते
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़म-ब-दिल शुक्र-ब-लब मस्त ओ ग़ज़ल-ख़्वाँ चलिए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़ारा का असर तो देखो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फ़िक्र-ए-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूँ या न करूँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़