Sad Poetry (page 141)

कभी भुलाया कभी याद कर लिया उस को

फ़ैसल अजमी

उस ने देखा जो मुझे आलम-ए-हैरानी में

फ़ैसल अजमी

तेरी आँखें न रहीं आईना-ख़ाना मिरे दोस्त

फ़ैसल अजमी

रख़्त-ए-सफ़र है इस में क़रीना भी चाहिए

फ़ैसल अजमी

मुझ को ये फ़िक्र कब है कि साया कहाँ गया

फ़ैसल अजमी

मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया

फ़ैसल अजमी

मैं ग़ार में था और हवा के बग़ैर था

फ़ैसल अजमी

हिज्र मौजूद है फ़साने में

फ़ैसल अजमी

हर शख़्स परेशान है घबराया हुआ है

फ़ैसल अजमी

दुख नहीं है कि जल रहा हूँ मैं

फ़ैसल अजमी

ज़बानों का बोसा

फ़हमीदा रियाज़

उस का दिल तो अच्छा दिल था

फ़हमीदा रियाज़

तिफ़्लाँ की तो कुछ तक़्सीर न थी

फ़हमीदा रियाज़

तफ़्सील मसाफ़त की

फ़हमीदा रियाज़

सोच

फ़हमीदा रियाज़

पूर्वांचल

फ़हमीदा रियाज़

पत्थर की ज़बान

फ़हमीदा रियाज़

नज़्र-ए-फ़िराक़

फ़हमीदा रियाज़

मेघ दूत

फ़हमीदा रियाज़

ख़ाकम-ब-दहन

फ़हमीदा रियाज़

जाप

फ़हमीदा रियाज़

इंक़िलाबी औरत

फ़हमीदा रियाज़

एक रात की कहानी

फ़हमीदा रियाज़

चादर और चार-दीवारी

फ़हमीदा रियाज़

बाकिरा

फ़हमीदा रियाज़

बैठा है मेरे सामने वो

फ़हमीदा रियाज़

आलम-ए-बर्ज़ख़

फ़हमीदा रियाज़

परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के

फ़हमी बदायूनी

ज़रा मोहतात होना चाहिए था

फ़हमी बदायूनी

तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं

फ़हमी बदायूनी