Sad Poetry (page 143)
अब तो कुछ भी याद नहीं
फ़हीम शनास काज़मी
आईना देखते हो
फ़हीम शनास काज़मी
आहिस्ता से गुज़रो
फ़हीम शनास काज़मी
उस ने पूछा भी मगर हाल छुपाए गए हम
फ़हीम शनास काज़मी
समझ रहा था मैं ये दिन गुज़रने वाला नहीं
फ़हीम शनास काज़मी
मैं यूँ जहाँ के ख़्वाब से तन्हा गुज़र गया
फ़हीम शनास काज़मी
हम एक दिन निकल आए थे ख़्वाब से बाहर
फ़हीम शनास काज़मी
दिल-ए-तबाह को अब तक नहीं यक़ीं आया
फ़हीम शनास काज़मी
धुँद में डूबी सारी फ़ज़ा थी उस के बाल भी गीले थे
फ़हीम शनास काज़मी
बदन को ख़ाक किया और लहू को आब किया
फ़हीम शनास काज़मी
तुम्हारी याद से ये रात कितनी रौशन है
फ़हीम जोगापुरी
कितने तूफ़ानों से हम उलझे तुझे मालूम क्या
फ़हीम जोगापुरी
हम अहल-ए-ग़म को हक़ारत से देखने वालो
फ़हीम जोगापुरी
बंद कमरे में तिरा दर्द न बुझ जाए कहीं
फ़हीम जोगापुरी
दोस्ती में न दुश्मनी में हम
फ़हीम जोगापुरी
लफ़्ज़ का बस है तअ'ल्लुक़ मेरे तेरे दरमियाँ
फ़हीम आज़मी
वो तमाशा ओ खेल होली का
फ़ाएज़ देहलवी
मुझ पास कभी वो क़द-ए-शमशाद न आया
फ़ाएज़ देहलवी
जागीर अगर बहुत न मिली हम कूँ ग़म नहीं
फ़ाएज़ देहलवी
जान-ए-अय्याम-ए-दिलबरी है याद
फ़ाएज़ देहलवी
हर आश्ना से उस बिन बेगाना हो रहा हूँ
फ़ाएज़ देहलवी
गुल तिरे मुख की फ़िक्र में बीमार
फ़ाएज़ देहलवी
धूप सा यू कपूल नारी है
फ़ाएज़ देहलवी
ऐ जान शब-ए-हिज्राँ तिरी सख़्त बड़ी है
फ़ाएज़ देहलवी
तुम ऐसा करना कि कोई जुगनू कोई सितारा सँभाल रखना
एज़ाज़ अहमद आज़र
दरख़्त-ए-जाँ पर अज़ाब-रुत थी न बर्ग जागे न फूल आए
एज़ाज़ अहमद आज़र
उजाले तेल छिड़कने लगे उजालों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
सरहद-ए-जल्वा से जो आगे निकल जाएगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
निगाह-ए-बाग़बाँ कुछ मेहरबाँ मा'लूम होती है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है
एज़ाज़ अफ़ज़ल