Sad Poetry (page 142)
सहराओं ने माँगा पानी
फ़हमी बदायूनी
पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा
फ़हमी बदायूनी
नमक की रोज़ मालिश कर रहे हैं
फ़हमी बदायूनी
मौत की सम्त जान चलती रही
फ़हमी बदायूनी
कोई मिलता नहीं ख़ुदा की तरह
फ़हमी बदायूनी
ख़त लिफ़ाफ़े में ग़ैर का निकला
फ़हमी बदायूनी
एक मेहमाँ का हिज्र तारी है
फ़हमी बदायूनी
चलती साँसों को जाम करने लगा
फ़हमी बदायूनी
बस तुम्हारा मकाँ दिखाई दिया
फ़हमी बदायूनी
यूँ जगमगा उठा है तिरी याद से वजूद
फ़हीम शनास काज़मी
उसी ने चाँद के पहलू में इक चराग़ रखा
फ़हीम शनास काज़मी
तुम्हारी याद निकलती नहीं मिरे दिल से
फ़हीम शनास काज़मी
फिर वही शाम वही दर्द वही अपना जुनूँ
फ़हीम शनास काज़मी
बिछड़ के तुझ से तिरी याद भी नहीं आई
फ़हीम शनास काज़मी
ज़िंदगी से मुकालिमा
फ़हीम शनास काज़मी
ज़मीं ख़्वाब ख़ुश्बू
फ़हीम शनास काज़मी
शब-गर्दों के लिए इक नज़्म
फ़हीम शनास काज़मी
सारबाँ
फ़हीम शनास काज़मी
सब्ज़ रुतों में क़दीम घरों की ख़ुशबू
फ़हीम शनास काज़मी
सब्र की चादर तह कर दी
फ़हीम शनास काज़मी
सब खेल-तमाशा ख़त्म हुआ
फ़हीम शनास काज़मी
राहदारी में गूँजती नज़्म
फ़हीम शनास काज़मी
मुझे कौन बुलाता रहता है
फ़हीम शनास काज़मी
''ला'' भी है एक गुमाँ
फ़हीम शनास काज़मी
ख़ुद-कुशी के पुल पर
फ़हीम शनास काज़मी
हमारे शजरे बिखर गए हैं
फ़हीम शनास काज़मी
भगत-सिंह के नाम
फ़हीम शनास काज़मी
बेबसी गीत बुनती रहती है
फ़हीम शनास काज़मी
अली-बाबा कोई सिम-सिम
फ़हीम शनास काज़मी
ऐ मुबारज़-तलब
फ़हीम शनास काज़मी