Sad Poetry (page 144)
ख़्वाबों के सनम-ख़ाने जब ढाए गए होंगे
एज़ाज़ अफ़ज़ल
हम ने मयख़ाने की तक़्दीस बचा ली होती
एज़ाज़ अफ़ज़ल
हर एक गाम पे आसूदगी खड़ी होगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दिलों के बीच बदन की फ़सील उठा दी जाए
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दर्स-ए-आराम मेरे ज़ौक़-ए-सफ़र ने न दिया
एज़ाज़ अफ़ज़ल
चलो कुछ तो राह तय हो न चले तो भूल होगी
एज़ाज़ अफ़ज़ल
आँगन आँगन ख़ाना-ख़राबी हँसती है मे'मारों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
आज दिल है कि सर-ए-शाम बुझा लगता है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
उजाले तेल छिड़कने लगे उजालों पर
एज़ाज़ अफ़ज़ल
किस क़दर मसअला-ए-शाम-ओ-सहर बदला है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
दो घड़ी साए में जलने की अज़िय्यत और है
एज़ाज़ अफ़ज़ल
लाशें
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
बदलते पहलू
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ज़ीस्त में ग़म हैं हम-सफ़र फिर भी
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
जग में आता है हर बशर तन्हा
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
डूबने वाले को तिनके का सहारा है बहुत
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
दर्द इक्सीर के सिवा क्या है
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
दामन तेरा मुझ से छूटा मिलने के हालात नहीं
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
ऐ ग़म-ए-दिल ये माजरा क्या है
एलिज़ाबेथ कुरियन मोना
मैं उस के ऐब उस को बताता भी किस तरह
एजाज़ वारसी
याद उन की दिल में आई वो आसूदगी लिए
एजाज़ वारसी
किसी के शिकवा-हा-ए-जौर से वाक़िफ़ ज़बाँ क्यूँ हो
एजाज़ वारसी
ख़ून-ए-नाहक़ थी फ़क़त दुनिया-ए-आब-ओ-गिल की बात
एजाज़ वारसी
कार-ए-ख़ैर इतना तो ऐ लग़्ज़िश-ए-पा हो जाता
एजाज़ वारसी
कहाँ सबात-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ सराब-ए-सुकूँ
एजाज़ वारसी
जिस को देखो बेवफ़ा है आइनों के शहर में
एजाज़ वारसी
दिल बुझ गया तो गर्मी-ए-बाज़ार भी नहीं
एजाज़ वारसी
चुप खड़े हैं दरमियान-ए-का'बा-ओ-बुत-ख़ाना हम
एजाज़ वारसी
दुनिया सबब-ए-शोरिश-ए-ग़म पूछ रही है
एजाज़ सिद्दीक़ी
ज़र्रों का मेहर-ओ-माह से याराना चाहिए
एजाज़ सिद्दीक़ी