Sad Poetry (page 146)

अजीब शख़्स था मैं भी भुला नहीं पाया

एजाज़ गुल

ज़रा बतला ज़माँ क्या है मकाँ के उस तरफ़ क्या है

एजाज़ गुल

ये घूमता हुआ आईना अपना ठहरा के

एजाज़ गुल

थम गई वक़्त की रफ़्तार तिरे कूचे में

एजाज़ गुल

सूरत-ए-सहर जाऊँ और दर-ब-दर जाऊँ

एजाज़ गुल

रह रहे हैं मकीं शबों के

एजाज़ गुल

क़ाफ़िला उतरा सहरा में और पेश वही मंज़र आए

एजाज़ गुल

पेचाक-ए-उम्र अपने सँवार आइने के साथ

एजाज़ गुल

नहीं शौक़-ए-ख़रीदारी में दौड़े जा रहा है

एजाज़ गुल

मंज़र-ए-वक़्त की यकसानी में बैठा हुआ हूँ

एजाज़ गुल

महमिल है मतलूब न लैला माँगता है

एजाज़ गुल

ख़ाशाक से ख़िज़ाँ में रहा नाम बाग़ का

एजाज़ गुल

कभी क़तार से बाहर कभी क़तार के बीच

एजाज़ गुल

इतना तिलिस्म याद के चक़माक़ में रहा

एजाज़ गुल

गली से अपनी उठाता है वो बहाने से

एजाज़ गुल

ढूँढता हूँ रोज़-ओ-शब कौन से जहाँ में है

एजाज़ गुल

ढूँढता हूँ रोज़-ओ-शब कौन से जहाँ में है

एजाज़ गुल

दर खोल के देखूँ ज़रा इदराक से बाहर

एजाज़ गुल

चल रहा हूँ पेश-ओ-पस-मंज़र से उकताया हुआ

एजाज़ गुल

अक्स उभरा न था आईना-ए-दिल-दारी का

एजाज़ गुल

तंहाई

एजाज़ फ़ारूक़ी

तकमील

एजाज़ फ़ारूक़ी

कतबा

एजाज़ फ़ारूक़ी

हर्फ़

एजाज़ फ़ारूक़ी

चुप

एजाज़ फ़ारूक़ी

अपना अपना रंग

एजाज़ फ़ारूक़ी

सदा-ए-अहद-ए-वफ़ा को ज़वाल क्यूँ आया

एजाज़ अासिफ़

रौशनी को तीरगी का क़हर बन कर ले गया

एजाज़ अासिफ़

नवेद-ए-यौम-ए-बहाराँ ख़िज़ाँ से ज़ाहिर हो

एजाज़ अासिफ़

किस दिल से हम इरादा-ए-तर्क-ए-जुनूँ करें

एजाज़ अासिफ़