Sad Poetry (page 148)

ग़म में इक मौज सरख़ुशी की है

एहतिशाम हुसैन

गया था बज़्म-ए-मोहब्बत में ख़ाली जाम लिए

एहतिशाम हुसैन

डर डर के जिसे मैं सुन रहा हूँ

एहतिशाम हुसैन

अक़्ल पहुँची जो रिवायात के काशाने तक

एहतिशाम हुसैन

सता रही है बहुत मछलियों की बास मुझे

एहतिशाम अख्तर

मिरी हयात को बे-रब्त बाब रहने दे

एहतिशाम अख्तर

चराग़ दिल का था रौशन बुझा गया पानी

एहतिशाम अख्तर

याद था 'सुक़रात' का क़िस्सा सभी को 'एहतिराम'

एहतराम इस्लाम

साथ रखिए काम आएगा बहुत नाम-ए-ख़ुदा

एहतराम इस्लाम

तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद

एहतराम इस्लाम

तौक़ीर अँधेरों की बढ़ा दी गई शायद

एहतराम इस्लाम

मुंतशिर हर शय क़रीने से सजा दी जाएगी

एहतराम इस्लाम

ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन

एहतराम इस्लाम

ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन

एहतराम इस्लाम

बज़्म-ए-तन्हाई में अक्स-ए-शो'ला-पैकर था कोई

एहतराम इस्लाम

याद आई जब मुझे 'फ़रहत' से छोटी थी बहन

एहसान साक़िब

ज़िंदगी इक आग है वो आग जलना चाहिए

एहसान जाफ़री

तुम अच्छे मसीहा हो दवा क्यूँ नहीं देते

एहसान जाफ़री

जज़्बात की शिद्दत से निखरता है बयाँ और

एहसान जाफ़री

बड़ी मुश्किलों से काटा बड़े कर्ब से गुज़ारा

एहसान दरबंगावी

याद तेरी जो कभी आती है बहलाने को

एहसान दरबंगावी

ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ

एहसान दरबंगावी

रहता नहीं इंसान तो मिट जाता है ग़म भी

एहसान दानिश

मक़्सद-ए-ज़ीस्त ग़म-ए-इश्क़ है सहरा हो कि शहर

एहसान दानिश

आज उस ने हँस के यूँ पूछा मिज़ाज

एहसान दानिश

यूँ न मिल मुझ से ख़फ़ा हो जैसे

एहसान दानिश

वफ़ाएँ कर के जफ़ाओं का ग़म उठाए जा

एहसान दानिश

तौबा की नाज़िशों पे सितम ढा के पी गया

एहसान दानिश

सोज़-ए-जुनूँ को दिल की ग़िज़ा कर दिया गया

एहसान दानिश

रंग-ए-तहज़ीब-ओ-तमद्दुन के शनासा हम भी हैं

एहसान दानिश