Sad Poetry (page 150)

बुलंद फ़िक्र की हर शे'र से अयाँ हो रमक़

डॉक्टर आज़म

बुलाना और न जाना चाहता हूँ

डॉक्टर आज़म

अश्क पर ज़ोर कुछ चला ही नहीं

डॉक्टर आज़म

अफ़सोस बनी ही नहीं पहचान अभी तक

डॉक्टर आज़म

इस इंतिज़ार में बैठे हैं उन की महफ़िल में

दिवाकर राही

अगर मौजें डुबो देतीं तो कुछ तस्कीन हो जाती

दिवाकर राही

इस शहर-ए-निगाराँ की कुछ बात निराली है

दिवाकर राही

सब्र के दरिया में जब आ जाएगा

दिनेश ठाकुर

क्या किसी की तलब नहीं होती

दिनेश ठाकुर

ग़म हमारा गुलाब हो जाए

दिनेश ठाकुर

आइने से कब तलक तुम अपना दिल बहलाओगे

दिनेश ठाकुर

ज़माने ठीक है इन से बहुत हुए रौशन

दिनेश नायडू

रात से दिन का वो जो रिश्ता थी

दिनेश नायडू

पूछता कौन वफ़ा से उस की

दिनेश नायडू

मुझ में आबाद सराबों का इलाक़ा करने

दिनेश नायडू

मिरे कमरे में पूरी चाँदनी है

दिनेश नायडू

मिरा ये मलबा मिरा ख़राबा तुम्हारी यादों से लड़ रहा है

दिनेश नायडू

जो भी निकले तिरी आवाज़ लगाता निकले

दिनेश नायडू

डरा रहे हैं ये मंज़र भी अब तो घर के मुझे

दिनेश नायडू

चाक पर मिट्टी को मर जाना है

दिनेश नायडू

कितने मेले हैं आसमानों में

दिलकश सागरी

दोस्तो तुम ने भी देखी है वो सूरत वो शबीह

दिलकश सागरी

चाँद भी सितारों को साथ ले के चलता है

दिलकश सागरी

रवानी ग़म की जिस में थी वो जौहर दे दिया मैं ने

दिलदार हाश्मी

मैं ने जब से चाहत के जुगनुओं को पाला है

दिलदार हाश्मी

तरही ग़ज़ल

दिलावर फ़िगार

तमाशा मिरे आगे

दिलावर फ़िगार

शायर-ए-आज़म

दिलावर फ़िगार

शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

साबिक़ वज़ीर

दिलावर फ़िगार