Sad Poetry (page 152)

अजीब रंग अजब हाल में पड़े हुए हैं

दिलावर अली आज़र

मैं ग़र्क़ हो रहा था कि तूफ़ान-ए-इश्क़ ने

दिल शाहजहाँपुरी

तमकीं है और हुस्न-ए-गरेबाँ है और हम

दिल शाहजहाँपुरी

फिर ए'तिबार-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा

दिल शाहजहाँपुरी

मायूस-ए-अज़ल हूँ ये माना नाकाम-ए-तमन्ना रहना है

दिल शाहजहाँपुरी

मय-ए-कौसर का असर चश्म-ए-सियह-फ़ाम में है

दिल शाहजहाँपुरी

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

ऐ इश्क़ तू ने वाक़िफ़-ए-मंज़िल बना दिया

दिल शाहजहाँपुरी

लम्हा लम्हा मुझे वीरान किए देता है

दिल अय्यूबी

रह गया ख़्वाब-ए-दिल-आराम अधूरा किस का

दिल अय्यूबी

मैं सिर्फ़ वो नहीं जो नज़र आ गया तुझे

दिल अय्यूबी

अदा-ए-हैरत-ए-आईना-गर भी रखते हैं

दिल अय्यूबी

ज़िंदगी इस तरह गुज़ारी है

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

देखते देखते ही साल गुज़र जाता है

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

आसमाँ खोल दिया पैरों में राहें रख दीं

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

तेरा क्या जाता जो मिलता जाम-ए-रेहानी मुझे

धनपत राय थापर राज़

उदासी के मंज़र मकानों में हैं

देवमणि पांडेय

क्या चाहा था क्या सोचा था क्या गुज़री क्या बात हुई

देवमणि पांडेय

कुछ यूँ सफ़र के शौक़ ने मंज़र दिखाए हैं

देवमणि पांडेय

जब भी चली है तेरी बात

देवमणि पांडेय

इश्क़ के रस्ते चलते चलते हम ऐसे मजबूर हुए

देवमणि पांडेय

दिल ने चाहा बहुत और मिला कुछ नहीं

देवमणि पांडेय

आईने में देख के चेहरा बे-शक मैं हैरान हुआ

देवमणि पांडेय

सुना है ख़ुद को

दीप्ति मिश्रा

डाइरी

दीप्ति मिश्रा

वो नहीं मेरा मगर उस से मोहब्बत है तो है

दीप्ति मिश्रा

दोनों में कितना फ़र्क़ मगर दोनों का हासिल तन्हाई

दीप्ति मिश्रा

बे-हद बेचैनी है लेकिन मक़्सद ज़ाहिर कुछ भी नहीं

दीप्ति मिश्रा

ज़िंदगी ख़राब हो गई

दीपक शर्मा दीप

बहुत गिर्या करोगी जानते हैं

दीपक शर्मा दीप