Sad Poetry (page 153)

नज़र आया न कोई भी इधर देखा उधर देखा

दीपक क़मर

उर्वशी आसमाँ से आ जाए

दीद राही

कुछ नहीं खुलता इब्तिदा क्या है

दीद राही

दिल से जब लौ लगी नहीं होती

दीद राही

ज़ीस्त बे-वादा-ए-अनवार-ए-सहर है कि जो थी

द्वारका दास शोला

ज़िंदगी क्या है इब्तिला के सिवा

द्वारका दास शोला

ज़रा निगाह उठाओ कि ग़म की रात कटे

द्वारका दास शोला

मेरी मंज़िल कहाँ है क्या मा'लूम

द्वारका दास शोला

मिरी बे-क़रारी मिरी आह-ओ-ज़ारी ये वहशत नहीं है तो फिर और क्या है

द्वारका दास शोला

इश्क़ में आबरू ख़राब हुई

द्वारका दास शोला

इंसाँ ब-यक निगाह बुरा भी भला भी है

द्वारका दास शोला

ग़म को वज्ह-ए-हयात कहते हैं

द्वारका दास शोला

देख जुर्म-ओ-सज़ा की बात न कर

द्वारका दास शोला

अपनों के सितम याद न ग़ैरों की जफ़ा याद

द्वारका दास शोला

विर्सा

दाऊद ग़ाज़ी

वक़्त की सदियाँ

दाऊद ग़ाज़ी

उम्मीद

दाऊद ग़ाज़ी

सौग़ात

दाऊद ग़ाज़ी

रूह-ए-आवारा

दाऊद ग़ाज़ी

रात

दाऊद ग़ाज़ी

मुलाक़ात

दाऊद ग़ाज़ी

मज़दूर

दाऊद ग़ाज़ी

मशवरा

दाऊद ग़ाज़ी

जवाज़

दाऊद ग़ाज़ी

यक क़दम राह-ए-दोस्त है 'दाऊद'

दाऊद औरंगाबादी

तुझ हिज्र की अगन कूँ बूझाने ऐ संग दिल

दाऊद औरंगाबादी

पिव बिना दिल मिरा उदासी है

दाऊद औरंगाबादी

हर किताब-ए-सोहबत-ए-रंगीं के मअ'नी देख कर

दाऊद औरंगाबादी

तेरी अँखियाँ के तसव्वुर में सदा मस्ताना हूँ

दाऊद औरंगाबादी

सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर

दाऊद औरंगाबादी