Sad Poetry (page 154)

मुझ साथ सैर-ए-बाग़ कूँ ऐ नौ-बहार चल

दाऊद औरंगाबादी

मिरा अहवाल चश्म-ए-यार सूँ पूछ

दाऊद औरंगाबादी

ले दाम-ए-निगाह-ए-यार आया

दाऊद औरंगाबादी

ख़िर्क़ा-पोशी में ख़ुद-नुमाई है

दाऊद औरंगाबादी

जग है मुश्ताक़ पिव के दर्शन का

दाऊद औरंगाबादी

इश्क़ ने तुझ ख़ाल के मुझ कूँ ख़याली किया

दाऊद औरंगाबादी

हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग

दाऊद औरंगाबादी

फ़रियाद सदा-ए-नफ़स आवाज़-ए-जरस है

दाऊद औरंगाबादी

दिल में ख़याल-ए-यार है जासूस की नमत

दाऊद औरंगाबादी

अगर वो गुल-बदन मुझ पास हो जावे तो क्या होवे

दाऊद औरंगाबादी

आतिश-ए-इश्क़ सूँ जो जलता है

दाऊद औरंगाबादी

आज बदली है हवा साक़ी पिला जाम-ए-शराब

दाऊद औरंगाबादी

तुम से अब क्या कहें वो चीज़ है दाग़-ए-ग़म-ए-इश्क़

दत्तात्रिया कैफ़ी

इश्क़ ने जिस दिल पे क़ब्ज़ा कर लिया

दत्तात्रिया कैफ़ी

ज़िंदगी का किस लिए मातम रहे

दत्तात्रिया कैफ़ी

या इलाही मुझ को ये क्या हो गया

दत्तात्रिया कैफ़ी

राहत कहाँ नसीब थी जो अब कहीं नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

क़िस्मत बुरे किसी के न इस तरह लाए दिन

दत्तात्रिया कैफ़ी

लुत्फ़ हो हश्र में कुछ बात बनाए न बने

दत्तात्रिया कैफ़ी

कोई दिल-लगी दिल लगाना नहीं है

दत्तात्रिया कैफ़ी

इश्क़ ही इश्क़ हो आशिक़ हो न माशूक़ जहाँ

दत्तात्रिया कैफ़ी

हुस्न-ए-अज़ल का जल्वा हमारी नज़र में है

दत्तात्रिया कैफ़ी

इक ख़्वाब का ख़याल है दुनिया कहें जिसे

दत्तात्रिया कैफ़ी

ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

सामने जो कहा नहीं होता

दरवेश भारती

ख़ुश-फमी-ए-हुनर ने सँभलने नहीं दिया

दरवेश भारती

जब से किसी से दर्द का रिश्ता नहीं रहा

दरवेश भारती

जब मोहब्बत का किसी शय पे असर हो जाए

दरवेश भारती

दर्द औरों का दिल में गर रखिए

दरवेश भारती

तिरे बग़ैर

दर्शिका वसानी