Sad Poetry (page 155)
पूरा चाँद
दर्शिका वसानी
क्या वहीं मिलोगे तुम
दर्शिका वसानी
काश
दर्शिका वसानी
एक और शराबी शाम
दर्शिका वसानी
बुढ़ापे की चोटी
दर्शिका वसानी
अश्क मेरे अपने
दर्शिका वसानी
भला ये कौन है मेरे ही अंदर मुझ से रंजिश में
दर्शिका वसानी
ये किस ने कह दिया आख़िर कि छुप-छुपा के पियो
दर्शन सिंह
वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा दे साक़ी
दर्शन सिंह
तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन
दर्शन सिंह
राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी
दर्शन सिंह
क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से अहल-ए-जहाँ मफ़र नहीं
दर्शन सिंह
मोहब्बत की मता-ए-जावेदानी ले के आया हूँ
दर्शन सिंह
लिबास-ए-फ़क़्र में हम को जो ख़ाकसार मिले
दर्शन सिंह
कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला
दर्शन सिंह
जज़्बा-ए-दिल को अमल में कभी लाओ तो सही
दर्शन सिंह
जब आदमी मुद्दआ-ए-हक़ है तो क्या कहें मुद्दआ' कहाँ है
दर्शन सिंह
इश्क़ शबनम नहीं शरारा है
दर्शन सिंह
इस राह में आते हैं बयाबाँ भी चमन भी
दर्शन सिंह
हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली
दर्शन सिंह
गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं
दर्शन सिंह
ग़म-ए-हयात पे ख़ंदाँ हैं तेरे दीवाने
दर्शन सिंह
दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले
दर्शन सिंह
चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं
दर्शन सिंह
बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर
दर्शन सिंह
आज दिल से दुआ करे कोई
दर्शन सिंह
वाए नादानी कि वक़्त-ए-मर्ग ये साबित हुआ
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
कभू रोना कभू हँसना कभू हैरान हो जाना
ख़्वाजा मीर 'दर्द'
हर-चंद तुझे सब्र नहीं दर्द व-लेकिन
ख़्वाजा मीर 'दर्द'