Sad Poetry (page 156)

हाल मुझ ग़म-ज़दा का जिस जिस ने

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ग़ाफ़िल ख़ुदा की याद पे मत भूल ज़ीनहार

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान को

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दर्द तू जो करे है जी का ज़ियाँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अज़िय्यत मुसीबत मलामत बलाएँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

आँखें भी हाए नज़अ में अपनी बदल गईं

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मिलाऊँ किस की आँखों से मैं अपनी चश्म-ए-हैराँ को

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

जग में कोई न टुक हँसा होगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

चमन में सुब्ह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

नज़्म-गो के लिए मशवरा

दानियाल तरीर

मैं नफ़ी में

दानियाल तरीर

एक सब आग एक सब पानी

दानियाल तरीर

आवाज़ का नौहा

दानियाल तरीर

शहर से क्या गई जानिब-ए-दश्त-ए-ज़र ज़िंदगी फ़ाख़्ता

दानियाल तरीर

रेत मुट्ठी में भरी पानी से आग़ाज़ किया

दानियाल तरीर

पानी के शीशों में रक्खी जाती है

दानियाल तरीर

ख़्वाब जज़ीरा बन सकते थे नहीं बने

दानियाल तरीर

चश्म-ए-वा ही न हुई जल्वा-नुमा क्या होता

दानियाल तरीर

बिला-जवाज़ नहीं है फ़लक से जंग मिरी

दानियाल तरीर

आग में जलते हुए देखा गया है

दानियाल तरीर