Sad Poetry (page 149)

रानाई-ए-कौनैन से बे-ज़ार हमीं थे

एहसान दानिश

रहे जो ज़िंदगी में ज़िंदगी का आसरा हो कर

एहसान दानिश

परस्तिश-ए-ग़म का शुक्रिया क्या तुझे आगही नहीं

एहसान दानिश

नज़र फ़रेब-ए-क़ज़ा खा गई तो क्या होगा

एहसान दानिश

न सियो होंट न ख़्वाबों में सदा दो हम को

एहसान दानिश

मौसम से रंग-ओ-बू हैं ख़फ़ा देखते चलो

एहसान दानिश

कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

कल रात कुछ अजीब समाँ ग़म-कदे में था

एहसान दानिश

कभी कभी जो वो ग़ुर्बत-कदे में आए हैं

एहसान दानिश

जो ले के उन की तमन्ना के ख़्वाब निकलेगा

एहसान दानिश

जीने के लिए जो मर रहे हैं

एहसान दानिश

जबीं की धूल जिगर की जलन छुपाएगा

एहसान दानिश

जब भी ख़ल्वत में वो याद आएगा

एहसान दानिश

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

दिल की रग़बत है जब आप ही की तरफ़

एहसान दानिश

बना देंगी दुनिया को इक दिन शराबी

एहसान दानिश

अपनी रुस्वाई का एहसास तो अब कुछ भी नहीं

एहसान दानिश

अब कहो कारवाँ किधर को चले

एहसान दानिश

आया नहीं है राह पे चर्ख़-ए-कुहन अभी

एहसान दानिश

आज भड़की रग-ए-वहशत तिरे दीवानों की

एहसान दानिश

ज़ख़्म शादाब देखते हैं मुझे

डॉ. पिन्हाँ

मंज़र है अभी दूर ज़रा हद्द-ए-नज़र से

डॉ. पिन्हाँ

हर दर्द से बाँधे हुए रिश्ता कोई गुज़रे

डाक्टर मोहम्मद अली जौहर

ज़ोम का ही तो आरिज़ा है मुझे

डॉक्टर आज़म

शौक़ बाक़ी नहीं बाक़ी नहीं अब जोश-ओ-ख़रोश

डॉक्टर आज़म

पुर-लुत्फ़ सुकूँ-बख़्श हवाएँ भी बहुत थीं

डॉक्टर आज़म

जो अना की सिफ़त है ज़ाती है

डॉक्टर आज़म

झुर्रियों की क़तार देखो तो

डॉक्टर आज़म

हर शख़्स में कुछ लोग कमी ढूँड रहे हैं

डॉक्टर आज़म

दिल मिरा चीख़ रहा था शायद

डॉक्टर आज़म