Sad Poetry (page 140)

दिल में अब यूँ तिरे भूले हुए ग़म आते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दरबार में अब सतवत-ए-शाही की अलामत

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चश्म-ए-मयगूँ ज़रा इधर कर दे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चाँद निकले किसी जानिब तिरी ज़ेबाई का

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बे-दम हुए बीमार दवा क्यूँ नहीं देते

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बात बस से निकल चली है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब के बरस दस्तूर-ए-सितम में क्या क्या बाब ईज़ाद हुए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब जो कोई पूछे भी तो उस से क्या शरह-ए-हालात करें

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आए कुछ अब्र कुछ शराब आए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उसी से फ़िक्र-ओ-फ़न को हर घड़ी मंसूब रखते हैं

फ़ैय्याज़ रश्क़

ताक़त के सारे ज़ोर को ख़ामोश कर दिया

फ़ैय्याज़ रश्क़

मिटा के तीरगी तनवीर चाहता है दिल

फ़ैय्याज़ रश्क़

ख़याल-ओ-ख़्वाब को परवाज़ देता रहता हूँ

फ़ैय्याज़ रश्क़

जारी तो हो सब के लिए फ़रमान-ए-मोहब्बत

फ़ैय्याज़ रश्क़

हर क़दम ख़ौफ़ है दहशत है रिया-कारी है

फ़ैय्याज़ रश्क़

उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से

फ़य्याज़ अहमद

कहा फ़लक ने ये उड़ते हुए परिंदों से

फ़ैसल सईद फ़ैसल

दर्द ने दिल की परवरिश की है

फ़ैसल सईद फ़ैसल

हिमाला की दासियाँ

फ़ैसल सईद फ़ैसल

ये तीरा-बख़्त बयानों में क़ैद रहते हैं

फ़ैसल सईद फ़ैसल

वस्फ़ जो आप से जुड़ा होगा

फ़ैसल सईद फ़ैसल

क्यूँ आसमान-ए-हिज्र के तारे चले गए

फ़ैसल फेहमी

इश्क़ की आज इंतिहा कर दो

फ़ैसल फेहमी

और तो कुछ नहीं किया होगा

फ़ैसल फेहमी

जिसे कल रात भर पूजा गया था

फ़ैसल अज़ीम

ख़ौफ़ ग़र्क़ाब हो गया 'फ़ैसल'

फ़ैसल अजमी

कभी देखा ही नहीं इस ने परेशाँ मुझ को

फ़ैसल अजमी