Sad Poetry (page 77)
फिर दिल से आ रही है सदा उस गली में चल
हबीब जालिब
नज़र नज़र में लिए तेरा प्यार फिरते हैं
हबीब जालिब
न डगमगाए कभी हम वफ़ा के रस्ते में
हबीब जालिब
'मीर'-ओ-'ग़ालिब' बने 'यगाना' बने
हबीब जालिब
लोग गीतों का नगर याद आया
हबीब जालिब
क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग-बिरंगी कारों में
हबीब जालिब
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ
हबीब जालिब
कितना सुकूत है रसन-ओ-दार की तरफ़
हबीब जालिब
कराहते हुए इंसान की सदा हम हैं
हबीब जालिब
कम पुराना बहुत नया था फ़िराक़
हबीब जालिब
कैसे कहें कि याद-ए-यार रात जा चुकी बहुत
हबीब जालिब
कहीं आह बन के लब पर तिरा नाम आ न जाए
हबीब जालिब
कभी तो मेहरबाँ हो कर बुला लें
हबीब जालिब
जीवन मुझ से मैं जीवन से शरमाता हूँ
हबीब जालिब
झूटी ख़बरें घड़ने वाले झूटे शे'र सुनाने वाले
हबीब जालिब
जागने वालो ता-ब-सहर ख़ामोश रहो
हबीब जालिब
जब कोई कली सेहन-ए-गुलिस्ताँ में खिली है
हबीब जालिब
इस शहर-ए-ख़राबी में ग़म-ए-इश्क़ के मारे
हबीब जालिब
इस शहर-ए-ख़राबी में ग़म-ए-इश्क़ के मारे
हबीब जालिब
हम ने सुना था सहन-ए-चमन में कैफ़ के बादल छाए हैं
हबीब जालिब
हम आवारा गाँव गाँव बस्ती बस्ती फिरने वाले
हबीब जालिब
हर-गाम पर थे शम्स-ओ-क़मर उस दयार में
हबीब जालिब
गुलशन की फ़ज़ा धुआँ धुआँ है
हबीब जालिब
ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या
हबीब जालिब
ग़ज़लें तो कही हैं कुछ हम ने उन से न कहा अहवाल तो क्या
हबीब जालिब
'ग़ालिब'-ओ-'यगाना' से लोग भी थे जब तन्हा
हबीब जालिब
'फ़ैज़' और 'फ़ैज़' का ग़म भूलने वाला है कहीं
हबीब जालिब
दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
हबीब जालिब
दिल-ए-पुर-शौक़ को पहलू में दबाए रक्खा
हबीब जालिब
दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या
हबीब जालिब