Sad Poetry (page 76)
शहर-ए-ज़ुल्मात को सबात नहीं
हबीब जालिब
सहाफ़ी से
हबीब जालिब
रेफ़्रेनडम
हबीब जालिब
'नूर-जहाँ'
हबीब जालिब
नाम क्या लूँ
हबीब जालिब
मुशीर
हबीब जालिब
मुम्ताज़
हबीब जालिब
मुलाक़ात
हबीब जालिब
मीरा-जी
हबीब जालिब
मेरी बच्ची
हबीब जालिब
मता-ए-ग़ैर
हबीब जालिब
लायल-पूर
हबीब जालिब
'लता'
हबीब जालिब
ख़ुदा हमारा है
हबीब जालिब
जम्हूरियत
हबीब जालिब
कॉफ़ी-हाउस
हबीब जालिब
बगिया लहूलुहान
हबीब जालिब
औरत
हबीब जालिब
ज़र्रे ही सही कोह से टकरा तो गए हम
हबीब जालिब
यूँ वो ज़ुल्मत से रहा दस्त-ओ-गरेबाँ यारो
हबीब जालिब
ये सोच कर न माइल-ए-फ़रियाद हम हुए
हबीब जालिब
ये और बात तेरी गली में न आएँ हम
हबीब जालिब
वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा
हबीब जालिब
उस ने जब हँस के नमस्कार किया
हबीब जालिब
उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं
हबीब जालिब
उस गली के लोगों को मुँह लगा के पछताए
हबीब जालिब
तुम से पहले वो जो इक शख़्स यहाँ तख़्त-नशीं था
हबीब जालिब
तेरी आँखों का अजब तुर्फ़ा समाँ देखा है
हबीब जालिब
तिरे माथे पे जब तक बल रहा है
हबीब जालिब
शहर वीराँ उदास हैं गलियाँ
हबीब जालिब