Sad Poetry (page 75)
तुम अज़ीज़ और तुम्हारा ग़म भी अज़ीज़
हादी मछलीशहरी
लुत्फ़-ए-जफ़ा इसी में है याद-ए-जफ़ा न आए फिर
हादी मछलीशहरी
हर मुसीबत थी मुझे ताज़ा पयाम-ए-आफ़ियत
हादी मछलीशहरी
ग़म-ए-दिल अब किसी के बस का नहीं
हादी मछलीशहरी
बेदर्द मुझ से शरह-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी न पूछ
हादी मछलीशहरी
अश्क-ए-ग़म उक़्दा-कुशा-ए-ख़लिश-ए-जाँ निकला
हादी मछलीशहरी
अब क्यूँ गिला रहेगा मुझे हिज्र-ए-यार का
हादी मछलीशहरी
वो निगाहें जो दिल-ए-महज़ूँ में पिन्हाँ हो गईं
हादी मछलीशहरी
उठने को तो उट्ठा हूँ महफ़िल से तिरी लेकिन
हादी मछलीशहरी
उस बेवफ़ा की बज़्म से चश्म-ए-ख़याल में
हादी मछलीशहरी
तुम अज़ीज़ और तुम्हारा ग़म भी अज़ीज़
हादी मछलीशहरी
तू न हो हम-नफ़स अगर जीने का लुत्फ़ ही नहीं
हादी मछलीशहरी
महव-ए-कमाल-ए-आरज़ू मुझ को बना के भूल जा
हादी मछलीशहरी
खोया हुआ सा रहता हूँ अक्सर मैं इश्क़ में
हादी मछलीशहरी
दर्द सा उठ के न रह जाए कहीं दिल के क़रीब
हादी मछलीशहरी
अश्क-ए-ग़म उक़्दा-कुशा-ए-ख़लिश-ए-जाँ निकला
हादी मछलीशहरी
वापसी
हबीब तनवीर
नीला आसमान
हबीब तनवीर
मैं नहीं जा पाऊँगा यारो सू-ए-गुलज़ार अभी
हबीब तनवीर
उन के आने के बाद भी 'जालिब'
हबीब जालिब
तू आग में ऐ औरत ज़िंदा भी जली बरसों
हबीब जालिब
न तेरी याद न दुनिया का ग़म न अपना ख़याल
हबीब जालिब
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ
हबीब जालिब
कुछ और भी हैं काम हमें ऐ ग़म-ए-जानाँ
हबीब जालिब
जिन की यादों से रौशन हैं मेरी आँखें
हबीब जालिब
इक तिरी याद से इक तेरे तसव्वुर से हमें
हबीब जालिब
ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना
हबीब जालिब
उट्ठो मरने का हक़ इस्तिमाल करो
हबीब जालिब
तेज़ चलो
हबीब जालिब
तेरे होने से
हबीब जालिब