Sad Poetry (page 73)

आख़िर एक दिन शाद करोगे

हफ़ीज़ जालंधरी

आ ही गया वो मुझ को लहद में उतारने

हफ़ीज़ जालंधरी

ज़माने भर के ग़म या इक तिरा ग़म

हफ़ीज़ होशियारपुरी

तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया

हफ़ीज़ होशियारपुरी

तमाम उम्र किया हम ने इंतिज़ार-ए-बहार

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कहीं ये तर्क-ए-मोहब्बत की इब्तिदा तो नहीं

हफ़ीज़ होशियारपुरी

ग़म-ए-ज़िंदगानी के सब सिलसिले

हफ़ीज़ होशियारपुरी

ग़म-ए-ज़माना तिरी ज़ुल्मतें ही क्या कम थीं

हफ़ीज़ होशियारपुरी

दुनिया में हैं काम बहुत

हफ़ीज़ होशियारपुरी

अगर तू इत्तिफ़ाक़न मिल भी जाए

हफ़ीज़ होशियारपुरी

आज की रात

हफ़ीज़ होशियारपुरी

तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया

हफ़ीज़ होशियारपुरी

राज़-ए-सर-बस्ता मोहब्बत के ज़बाँ तक पहुँचे

हफ़ीज़ होशियारपुरी

फिर से आराइश-ए-हस्ती के जो सामाँ होंगे

हफ़ीज़ होशियारपुरी

नर्गिस पे तो इल्ज़ाम लगा बे-बसरी का

हफ़ीज़ होशियारपुरी

न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू

हफ़ीज़ होशियारपुरी

मोहब्बत करने वाले कम न होंगे

हफ़ीज़ होशियारपुरी

मन-ओ-तू का हिजाब उठने न दे ऐ जान-ए-यकताई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कहाँ कहाँ न तसव्वुर ने दाम फैलाए

हफ़ीज़ होशियारपुरी

ग़म-ए-आफ़ाक़ है रुस्वा ग़म-ए-दिल-बर बन के

हफ़ीज़ होशियारपुरी

इक उम्र से हम तुम आश्ना हैं

हफ़ीज़ होशियारपुरी

बे-चारगी-ए-हसरत-ए-दीदार देखना

हफ़ीज़ होशियारपुरी

ऐसी भी क्या जल्दी प्यारे जाने मिलें फिर या न मिलें हम

हफ़ीज़ होशियारपुरी

अब कोई आरज़ू नहीं शौक़-ए-पयाम के सिवा

हफ़ीज़ होशियारपुरी

आज उन्हें कुछ इस तरह जी खोल कर देखा किए

हफ़ीज़ होशियारपुरी

ये किस मक़ाम पे लाई है ज़िंदगी हम को

हफ़ीज़ बनारसी

फूल अफ़्सुर्दा बुलबुलें ख़ामोश

हफ़ीज़ बनारसी

किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत

हफ़ीज़ बनारसी