Sad Poetry (page 71)
मेरी शाएरी
हफ़ीज़ जालंधरी
कृष्ण कन्हैया
हफ़ीज़ जालंधरी
फ़ुर्सत की तमन्ना में
हफ़ीज़ जालंधरी
एक लड़की शादाँ
हफ़ीज़ जालंधरी
बसंती तराना
हफ़ीज़ जालंधरी
अभी तो मैं जवान हूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
अब ख़ूब हँसेगा दीवाना
हफ़ीज़ जालंधरी
आख़िरी रात
हफ़ीज़ जालंधरी
ज़िंदगी का लुत्फ़ भी आ जाएगा
हफ़ीज़ जालंधरी
ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है
हफ़ीज़ जालंधरी
ये क्या मक़ाम है वो नज़ारे कहाँ गए
हफ़ीज़ जालंधरी
ये और दौर है अब और कुछ न फ़रमाए
हफ़ीज़ जालंधरी
वो क़ाफ़िला आराम-तलब हो भी तो क्या हो
हफ़ीज़ जालंधरी
वो अब्र जो मय-ख़्वार की तुर्बत पे न बरसे
हफ़ीज़ जालंधरी
वफ़ादारियाँ सख़्त नादानियाँ हैं
हफ़ीज़ जालंधरी
उठो अब देर होती है वहाँ चल कर सँवर जाना
हफ़ीज़ जालंधरी
उस शोख़ ने निगाह न की हम भी चुप रहे
हफ़ीज़ जालंधरी
उन को जिगर की जुस्तुजू उन की नज़र को क्या करूँ
हफ़ीज़ जालंधरी
तीर चिल्ले पे न आना कि ख़ता हो जाना
हफ़ीज़ जालंधरी
तिरे दिल में भी हैं कुदूरतें तिरे लब पे भी हैं शिकायतें
हफ़ीज़ जालंधरी
शैख़ का ख़ौफ़ हमें हश्र का धड़का हम को
हफ़ीज़ जालंधरी
फिर लुत्फ़-ए-ख़लिश देने लगी याद किसी की
हफ़ीज़ जालंधरी
ओ दिल तोड़ के जाने वाले दिल की बात बताता जा
हफ़ीज़ जालंधरी
निगाह-ए-आरज़ू-आमोज़ का चर्चा न हो जाए
हफ़ीज़ जालंधरी
न कर दिल-जूई ऐ सय्याद मेरी
हफ़ीज़ जालंधरी
मुझे शाद रखना कि नाशाद रखना
हफ़ीज़ जालंधरी
मुद्दतों तक जो पढ़ाया किया उस्ताद मुझे
हफ़ीज़ जालंधरी
मिटने वाली हसरतें ईजाद कर लेता हूँ मैं
हफ़ीज़ जालंधरी
मज़हका आओ उड़ाएँ इश्क़-ए-बे-बुनियाद का
हफ़ीज़ जालंधरी
मौत के चेहरे पे है क्यूँ मुर्दनी छाई हुई
हफ़ीज़ जालंधरी