Sad Poetry (page 70)

बताऊँ क्या किसी को मैं कि तुम क्या चीज़ हो क्या हो

हफ़ीज़ जौनपुरी

बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है

हफ़ीज़ जौनपुरी

अजब ज़माने की गर्दिशें हैं ख़ुदा ही बस याद आ रहा है

हफ़ीज़ जौनपुरी

अफ़्सुर्दगी-ए-दिल से ये रंग है सुख़न में

हफ़ीज़ जौनपुरी

अदा परियों की सूरत हूर की आँखें ग़ज़ालों की

हफ़ीज़ जौनपुरी

अब तो नहीं आसरा किसी का

हफ़ीज़ जौनपुरी

आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बरसों यूँ ज़ब्त से हम ने काम लिया

हफ़ीज़ जौनपुरी

आग़ाज़-ए-मोहब्बत में बरसों यूँ ज़ब्त से हम ने काम लिया

हफ़ीज़ जौनपुरी

ज़िंदगी फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता को पा सकती नहीं

हफ़ीज़ जालंधरी

तन्हाई-ए-फ़िराक़ में उम्मीद बार-हा

हफ़ीज़ जालंधरी

फिर दे के ख़ुशी हम उसे नाशाद करें क्यूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

मैं वो बस्ती हूँ कि याद-ए-रफ़्तगाँ के भेस में

हफ़ीज़ जालंधरी

क्यूँ हिज्र के शिकवे करता है क्यूँ दर्द के रोने रोता है

हफ़ीज़ जालंधरी

कोई दवा न दे सके मशवरा-ए-दुआ दिया

हफ़ीज़ जालंधरी

ख़ामोश हो गईं जो उमंगें शबाब की

हफ़ीज़ जालंधरी

इलाही एक ग़म-ए-रोज़गार क्या कम था

हफ़ीज़ जालंधरी

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

हफ़ीज़ जालंधरी

हाथ रख रख के वो सीने पे किसी का कहना

हफ़ीज़ जालंधरी

हाँ मैं तो लिए फिरता हूँ इक सजदा-ए-बेताब

हफ़ीज़ जालंधरी

हाँ कैफ़-ए-बे-ख़ुदी की वो साअत भी याद है

हफ़ीज़ जालंधरी

हाए कोई दवा करो हाए कोई दुआ करो

हफ़ीज़ जालंधरी

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल को ख़ुदा की याद तले भी दबा चुका

हफ़ीज़ जालंधरी

भुलाई नहीं जा सकेंगी ये बातें

हफ़ीज़ जालंधरी

बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी अच्छी नहीं

हफ़ीज़ जालंधरी

अहल-ए-ज़बाँ तो हैं बहुत कोई नहीं है अहल-ए-दिल

हफ़ीज़ जालंधरी

आने वाले किसी तूफ़ान का रोना रो कर

हफ़ीज़ जालंधरी

शाएर

हफ़ीज़ जालंधरी

रक़्क़ासा

हफ़ीज़ जालंधरी

पिए जा

हफ़ीज़ जालंधरी