Sad Poetry (page 69)
न आ जाए किसी पर दिल किसी का
हफ़ीज़ जौनपुरी
मुसीबतें तो उठा कर बड़ी बड़ी भूले
हफ़ीज़ जौनपुरी
मुँह मिरा एक एक तकता था
हफ़ीज़ जौनपुरी
मोहब्बत क्या बढ़ी है वहम बाहम बढ़ते जाते हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
मिरे ऐबों की इस्लाहें हुआ कीं बहस-ए-दुश्मन से
हफ़ीज़ जौनपुरी
कोई जहाँ में न यारब हो मुब्तला-ए-फ़िराक़
हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़ुद-ब-ख़ुद आँख बदल कर ये सवाल अच्छा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़ुद-बख़ुद आँख बदल कर ये सवाल अच्छा है
हफ़ीज़ जौनपुरी
ख़राब-ओ-ख़स्ता हुए ख़ाक में शबाब मिला
हफ़ीज़ जौनपुरी
कहीं मरने वाले कहा मानते हैं
हफ़ीज़ जौनपुरी
कहा ये किस ने कि वादे का ए'तिबार न था
हफ़ीज़ जौनपुरी
जाओ भी जिगर क्या है जो बेदाद करोगे
हफ़ीज़ जौनपुरी
जब तक कि तबीअ'त से तबीअत नहीं मिलती
हफ़ीज़ जौनपुरी
जान ही जाए तो जाए दर्द-ए-दिल
हफ़ीज़ जौनपुरी
इसी ख़याल से तर्क उन की चाह कर न सके
हफ़ीज़ जौनपुरी
इधर होते होते उधर होते होते
हफ़ीज़ जौनपुरी
हुए इश्क़ में इम्तिहाँ कैसे कैसे
हफ़ीज़ जौनपुरी
हसीनों से फ़क़त साहिब-सलामत दूर की अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
'हफ़ीज़' वस्ल में कुछ हिज्र का ख़याल न था
हफ़ीज़ जौनपुरी
हाए अब कौन लगी दिल की बुझाने आए
हफ़ीज़ जौनपुरी
गो ये रखती नहीं इंसान की हालत अच्छी
हफ़ीज़ जौनपुरी
दुनिया में यूँ तो हर कोई अपनी सी कर गया
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिया जब जाम-ए-मय साक़ी ने भर के
हफ़ीज़ जौनपुरी
दीवाने हुए सहरा में फिरे ये हाल तुम्हारे ग़म ने किया
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल पर लगा रही है वो नीची निगाह चोट
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल में हैं वस्ल के अरमान बहुत
हफ़ीज़ जौनपुरी
दिल को इसी सबब से है इज़्तिराब शायद
हफ़ीज़ जौनपुरी
चाक-ए-दामाँ न रहा चाक-ए-गरेबाँ न रहा
हफ़ीज़ जौनपुरी
बुत-कदा नज़दीक काबा दूर था
हफ़ीज़ जौनपुरी
बिगड़ जाते थे सुन कर याद है कुछ वो ज़माना भी
हफ़ीज़ जौनपुरी