Sad Poetry (page 68)

बड़े अदब से ग़ुरूर-ए-सितम-गराँ बोला

हफ़ीज़ मेरठी

बाद-ए-सबा ये ज़ुल्म ख़ुदा-रा न कीजियो

हफ़ीज़ मेरठी

ऐ दिल ख़ुशी का ज़िक्र भी करने न दे मुझे

हफ़ीज़ मेरठी

याद आईं उस को देख के अपनी मुसीबतें

हफ़ीज़ जौनपुरी

क़ैद में इतना ज़माना हो गया

हफ़ीज़ जौनपुरी

कभी मस्जिद में जो वाइज़ का बयाँ सुनता हूँ

हफ़ीज़ जौनपुरी

जो दीवानों ने पैमाइश की है मैदान-ए-क़यामत की

हफ़ीज़ जौनपुरी

जब न था ज़ब्त तो क्यूँ आए अयादत के लिए

हफ़ीज़ जौनपुरी

हमें याद रखना हमें याद करना

हफ़ीज़ जौनपुरी

आशिक़ की बे-कसी का तो आलम न पूछिए

हफ़ीज़ जौनपुरी

ज़माने का भरोसा क्या अभी कुछ है अभी कुछ है

हफ़ीज़ जौनपुरी

यूँ उठा दे हमारे जी से ग़रज़

हफ़ीज़ जौनपुरी

ये सब कहने की बातें हैं कि ऐसा हो नहीं सकता

हफ़ीज़ जौनपुरी

यही मसअला है जो ज़ाहिदो तो मुझे कुछ इस में कलाम है

हफ़ीज़ जौनपुरी

याद है पहले-पहल की वो मुलाक़ात की बात

हफ़ीज़ जौनपुरी

याद है पहले-पहल की वो मुलाक़ात की बात

हफ़ीज़ जौनपुरी

वस्ल में आपस की हुज्जत और है

हफ़ीज़ जौनपुरी

वस्ल आसान है क्या मुश्किल है

हफ़ीज़ जौनपुरी

उन की ये ज़िद कि मिरे घर में न आए कोई

हफ़ीज़ जौनपुरी

उन को दिल दे के पशेमानी है

हफ़ीज़ जौनपुरी

सुन के मेरे इश्क़ की रूदाद को

हफ़ीज़ जौनपुरी

शिकवा करते हैं ज़बाँ से न गिला करते हैं

हफ़ीज़ जौनपुरी

शब-ए-वस्ल है बहस हुज्जत अबस

हफ़ीज़ जौनपुरी

शब-ए-विसाल ये कहते हैं वो सुना के मुझे

हफ़ीज़ जौनपुरी

शब-ए-विसाल लगाया जो उन को सीने से

हफ़ीज़ जौनपुरी

साथ रहते इतनी मुद्दत हो गई

हफ़ीज़ जौनपुरी

सदमे जो कुछ हों दिल पे सहिए

हफ़ीज़ जौनपुरी

क़ासिद ख़िलाफ़-ए-ख़त कहीं तेरा बयाँ न हो

हफ़ीज़ जौनपुरी

पत्थर से न मारो मुझे दीवाना समझ कर

हफ़ीज़ जौनपुरी

नाज़नीं जिन के कुछ नियाज़ नहीं

हफ़ीज़ जौनपुरी