Sad Poetry (page 67)

ऐ जुनूँ होते हैं सहरा पर उतारे शहर से

हैदर अली आतिश

आश्ना गोश से उस गुल के सुख़न है किस का

हैदर अली आतिश

आइना-ख़ाना करेंगे दिल-ए-नाकाम को हम

हैदर अली आतिश

आइना सीना-ए-साहब-नज़राँ है कि जो था

हैदर अली आतिश

आबले पावँ के क्या तू ने हमारे तोड़े

हैदर अली आतिश

सिमटा तिरा ख़याल तो गुल-रंग अश्क था

हफ़ीज़ ताईब

वो जो तेरी तलब में ईज़ा थी

हफ़ीज़ ताईब

शरर-अफ़शाँ वो शरर-ख़ू भी नहीं

हफ़ीज़ ताईब

पत्थर में फ़न के फूल खिला कर चला गया

हफ़ीज़ ताईब

लफ़्ज़ से जब न उठा बार-ए-ख़याल

हफ़ीज़ ताईब

इक नया कर्ब मिरे दिल में जनम लेता है

हफ़ीज़ ताईब

इक दर्द सा पहलू में मचलता है सर-ए-शाम

हफ़ीज़ ताईब

यारा-ए-गुफ़्तुगू नहीं आँखों में दम नहीं

हाफ़िज़ लुधियानवी

शो'ला-ए-दर्द ब-उन्वान-ए-तजल्ला ही सही

हाफ़िज़ लुधियानवी

हर शे'र ग़ज़ल का कह रहा है

हाफ़िज़ लुधियानवी

है वज्ह-ए-सुकून-ए-दिल-ए-आशुफ़्ता-नवा भी

हाफ़िज़ लुधियानवी

आज यूँ दर्द तिरा दिल के उफ़ुक़ पर चमका

हाफ़िज़ लुधियानवी

ए'तिराफ़

हफ़ीज़ अहमद

ये भी तो सोचिए कभी तन्हाई में ज़रा

हफ़ीज़ मेरठी

सिर्फ़ ज़बाँ की नक़्क़ाली से बात न बन पाएगी 'हफ़ीज़'

हफ़ीज़ मेरठी

शैख़ क़ातिल को मसीहा कह गए

हफ़ीज़ मेरठी

रसा हों या न हों नाले ये नालों का मुक़द्दर है

हफ़ीज़ मेरठी

बद-तर है मौत से भी ग़ुलामी की ज़िंदगी

हफ़ीज़ मेरठी

तमाम रात आँसुओं से ग़म उजालता रहा

हफ़ीज़ मेरठी

सितम की तेग़ ये कहती है सर न ऊँचा कर

हफ़ीज़ मेरठी

पी कर चैन अगर आया भी कितनी देर को आएगा

हफ़ीज़ मेरठी

इस दीवाने दिल को देखो क्या शेवा अपनाए है

हफ़ीज़ मेरठी

गुदाज़-ए-दिल से मिला सोज़िश-ए-जिगर से मिला

हफ़ीज़ मेरठी

दार-ओ-रसन ने किस को चुना देखते चलें

हफ़ीज़ मेरठी

बज़्म-ए-तकल्लुफ़ात सजाने में रह गया

हफ़ीज़ मेरठी