Sharab Poetry (page 36)
तक़लीद अब मैं हज़रत-ए-वाइज़ की क्यूँ करूँ
अज़ीज़ लखनवी
दुआएँ माँगी हैं साक़ी ने खोल कर ज़ुल्फ़ें
अज़ीज़ लखनवी
'मीर'
अज़ीज़ लखनवी
बचपने की याद
अज़ीज़ लखनवी
आतिश-ए-ख़ामोश
अज़ीज़ लखनवी
कर चुके बर्बाद दिल को फ़िक्र क्या अंजाम की
अज़ीज़ लखनवी
जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए
अज़ीज़ लखनवी
जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए
अज़ीज़ लखनवी
जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया
अज़ीज़ लखनवी
इश्क़ जो मेराज का इक ज़ीना है
अज़ीज़ लखनवी
हिज्र की रात याद आती है
अज़ीज़ लखनवी
दिल हमारा है कि हम माइल-ए-फ़रियाद नहीं
अज़ीज़ लखनवी
चश्म-ए-साक़ी का तसव्वुर बज़्म में काम आ गया
अज़ीज़ लखनवी
ऐ दिल ये है ख़िलाफ़-ए-रस्म-ए-वफ़ा-परस्ती
अज़ीज़ लखनवी
ज़ालिम तिरे वादों ने दीवाना बना रक्खा
अज़ीज़ हैदराबादी
उठाईं हिज्र की शब दिल ने आफ़तें क्या क्या
अज़ीज़ हैदराबादी
नारा-ए-तकबीर भी ज़ाहिद निसार-ए-नग़मा है
अज़ीज़ हैदराबादी
क्यूँ ख़फ़ा हो क्यूँ इधर आते नहीं
अज़ीज़ हैदराबादी
जफ़ा देखनी थी सितम देखना था
अज़ीज़ हैदराबादी
ज़हर का जाम ही दे ज़हर भी है आब-ए-हयात
अज़ीज़ हामिद मदनी
उन को ऐ नर्म हवा ख़्वाब-ए-जुनूँ से न जगा
अज़ीज़ हामिद मदनी
ताज़ा हवा बहार की दिल का मलाल ले गई
अज़ीज़ हामिद मदनी
तल्ख़-तर और ज़रा बादा-ए-साफ़ी साक़ी
अज़ीज़ हामिद मदनी
निसार यूँ तो हुआ तुझ पे नक़्द-ए-जाँ क्या क्या
अज़ीज़ हामिद मदनी
नक़्शे उसी के दिल में हैं अब तक खिंचे हुए
अज़ीज़ हामिद मदनी
मिरी आँखें गवाह-ए-तल'अत-ए-आतिश हुईं जल कर
अज़ीज़ हामिद मदनी
लिखी हुई जो तबाही है उस से क्या जाता
अज़ीज़ हामिद मदनी
क्या हुए बाद-ए-बयाबाँ के पुकारे हुए लोग
अज़ीज़ हामिद मदनी
जी है बहुत उदास तबीअत हज़ीं बहुत
अज़ीज़ हामिद मदनी
हिकायत-ए-हुस्न-ए-यार लिखना हदीस-ए-मीना-ओ-जाम कहना
अज़ीज़ हामिद मदनी