दर Poetry (page 48)

आ बसे कितने नए लोग मकान-ए-जाँ में

हसन नईम

रश्क अपनों को यही है हम ने जो चाहा मिला

हसन नईम

मिला न काम कोई उम्र-भर जुनूँ के सिवा

हसन नईम

ख़्वाब की राह में आए न दर-ओ-बाम कभी

हसन नईम

ख़याल-ओ-ख़्वाब में कब तक ये गुफ़्तुगू होगी

हसन नईम

एक भी हर्फ़ न था ख़ुश-ख़बरी का लिक्खा

हसन नईम

दिल वो किश्त-ए-आरज़ू था जिस की पैमाइश न की

हसन नईम

दिल में उतरोगे तो इक जू-ए-वफ़ा पाओगे

हसन नईम

आइनों से पहले भी रस्म-ए-ख़ुद-नुमाई थी

हसन नज्मी सिकन्दरपुरी

ज़िंदगी भर दर-ओ-दीवार सजाए जाएँ

हसन जमील

वो मन गए तो वस्ल का होगा मज़ा नसीब

हसन बरेलवी

जल्वे तिरे जो रौनक़-ए-बाज़ार हो गए

हसन बरेलवी

जल्वे तिरे जो रौनक़-ए-बाज़ार हो गए

हसन बरेलवी

मैं टूटने देता नहीं रंगों का तसलसुल

हसन अज़ीज़

भटक रहा हूँ मैं इस दश्त-ए-संग में कब से

हसन अज़ीज़

शुआ-ए-ज़र न मिली रंग-ए-शाइराना मिला

हसन अज़ीज़

ख़ुद पर कोई तूफ़ान गुज़र जाने के डर से

हसन अज़ीज़

अजीब हाल है सहरा-नशीं हैं घर वाले

हसन अज़ीज़

रंग-ए-सियाह के नाम एक नज़्म

हसन अकबर कमाल

हुनर जो तालिब-ए-ज़र हो हुनर नहीं रहता

हसन अकबर कमाल

हो तेरी याद का दिल में गुज़र आहिस्ता आहिस्ता

हसन अकबर कमाल

दूध जैसा झाग लहरें रेत और ये सीपियाँ

हसन अकबर कमाल

दूध जैसा झाग लहरें रेत और ये सीपियाँ

हसन अकबर कमाल

आज भी तेरी ही सूरत है मुक़ाबिल मेरे

हसन अकबर कमाल

शहर-ए-ना-पुरसाँ में कुछ अपना पता मिलता नहीं

हसन आबिदी

ऐ ख़ुदा इंसान की तक़्सीम-दर-तक़्सीम देख

हसन आबिदी

शहर-ए-ना-पुरसाँ में कुछ अपना पता मिलता नहीं

हसन आबिदी

पल रहे हैं कितने अंदेशे दिलों के दरमियाँ

हसन आबिदी

कौन देखे मेरी शाख़ों के समर टूटे हुए

हसन आबिदी

तीसरी आँख

हसन अब्बास रज़ा

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