उम्र-ए-अबद का मा-हसल इश्क़ का दौर-ए-ना-तमाम

उम्र-ए-अबद का मा-हसल इश्क़ का दौर-ए-ना-तमाम

हाए वो मस्ती-ए-सहर हाए वो बे-ख़ुदी-ए-शाम

पहले मआल सोच लें हम-सफ़रान-ए-सुस्त-गाम

मेरी सरिश्त में नहीं ख़्वाहिश-ए-मंज़िल-ओ-मक़ाम

ताइर-ए-ख़स्ता-हाल को दाम भी कुंज-ए-आशियाँ

मुर्ग़-ए-चमन-नवर्द को गोशा-ए-आशियाँ भी दाम

अब भी ख़ुदा-परस्त है दैर-ओ-हरम की क़ैद में

हाए-निगाह-ए-ना-रसा हाए-मज़ाक़-ए-ना-तमाम

कैफ़-ए-नज़र की मस्तियाँ अहल-ए-नज़र से पूछिए

जैसे कोई पिला गया बादा-ए-मुश्क-बू के जाम

ख़ूबी-ओ-शान-ए-दिलबरी ग़म्ज़ा-ओ-नाज़ ही नहीं

हुस्न में वो अदा भी है जिस का नहीं है कोई नाम

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