Ghazal Poetry (page 31)
दिल मर चुका है अब न मसीहा बना करो
ज़हीर काश्मीरी
अहल-ए-दिल मिलते नहीं अहल-ए-नज़र मिलते नहीं
ज़हीर काश्मीरी
अब मिरी याद को दामन की हवाएँ देना
ज़हीर काश्मीरी
अब इश्क़ से लौ लगाएँगे हम
ज़हीर काश्मीरी
अब है क्या लाख बदल चश्म-ए-गुरेज़ाँ की तरह
ज़हीर काश्मीरी
आरिज़-ए-शम्अ' पे नींद आ गई परवानों को
ज़हीर काश्मीरी
आँधियाँ उट्ठीं फ़ज़ाएँ दूर तक कजला गईं
ज़हीर काश्मीरी
आज की तन्हाई से निकलो कल की आबादी में आओ
ज़हीर काश्मीरी
उतरे तो कई बार सहीफ़े मिरे घर में
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
क्या दुआ-ए-फ़र्सूदा हर्फ़-ए-बे-असर माँगूँ
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
हर ग़ज़ल हर शेर अपना इस्तिआरा-आश्ना
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
हर आदमी को ख़्वाब दिखाना मुहाल है
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
ऐसे लम्हे पर हमें क़ुर्बान हो जाना पड़ा
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
आइने में ख़ुद अपना चेहरा है
ज़हीर ग़ाज़ीपुरी
जमाल पा के तब-ओ-ताब-ए-ग़म यगाना हुआ है
ज़हीर फ़तेहपूरी
दर्द इन दिनों यूँ चेहरा-ए-आलम पे सजा है
ज़हीर फ़तेहपूरी
अब दर्द बे-दयार है और जग-हँसाई है
ज़हीर फ़तेहपूरी
ये सब कहने की बातें हैं हम उन को छोड़ बैठे हैं
ज़हीर देहलवी
वो नैरंग-ए-उल्फ़त को क्या जानता है
ज़हीर देहलवी
वो किसी से तुम को जो रब्त था तुम्हें याद हो कि न याद हो
ज़हीर देहलवी
वो किस प्यार से कोसने दे रहे हैं
ज़हीर देहलवी
वो जो कुछ कुछ निगह मिलाने लगे
ज़हीर देहलवी
वो झूटा इश्क़ है जिस में फ़ुग़ाँ हो
ज़हीर देहलवी
वाँ तबीअत दम-ए-तक़रीर बिगड़ जाती है
ज़हीर देहलवी
उन को हाल-ए-दिल-ए-पुर-सोज़ सुना कर उट्ठे
ज़हीर देहलवी
तल्ख़ शिकवे लब-ए-शीरीं से मज़ा देते हैं
ज़हीर देहलवी
तलाफ़ी वफ़ा की जफ़ा चाहता हूँ
ज़हीर देहलवी
साक़िया मर के उठेंगे तिरे मय-ख़ाने से
ज़हीर देहलवी
सख़्त दुश्वार है पहलू में बचाना दिल का
ज़हीर देहलवी
रक़ीबों को हमराह लाना न छोड़ा
ज़हीर देहलवी