Ghazal Poetry (page 30)
वो महफ़िलें वो मिस्र के बाज़ार क्या हुए
ज़हीर काश्मीरी
वो इक झलक दिखा के जिधर से निकल गया
ज़हीर काश्मीरी
वो अक्सर बातों बातों में अग़्यार से पूछा करते हैं
ज़हीर काश्मीरी
तू अगर ग़ैर है नज़दीक-ए-रग-ए-जाँ क्यूँ है
ज़हीर काश्मीरी
तिरी चश्म-ए-तरब को देखना पड़ता है पुर-नम भी
ज़हीर काश्मीरी
तलब आसूदगी की अर्सा-ए-दुनिया में रखते हैं
ज़हीर काश्मीरी
शब-ए-महताब भी अपनी भरी-बरसात भी अपनी
ज़हीर काश्मीरी
शब-ए-ग़म याद उन की आ रही है
ज़हीर काश्मीरी
परवाना जल के साहब-ए-किरदार बन गया
ज़हीर काश्मीरी
मुज़्महिल होने पे भी ख़ुद को जवाँ रखते हैं हम
ज़हीर काश्मीरी
मिरा ही बन के वो बुत मुझ से आश्ना न हुआ
ज़हीर काश्मीरी
मौसम बदला रुत गदराई अहल-ए-जुनूँ बेबाक हुए
ज़हीर काश्मीरी
मरना अज़ाब था कभी जीना अज़ाब था
ज़हीर काश्मीरी
मरना अज़ाब था कभी जीना अज़ाब था
ज़हीर काश्मीरी
मैं हूँ वहशत में गुम मैं तेरी दुनिया में नहीं रहता
ज़हीर काश्मीरी
लौह-ए-मज़ार देख के जी दंग रह गया
ज़हीर काश्मीरी
कुछ बस न चला जज़्बा-ए-ख़ुद-काम के आगे
ज़हीर काश्मीरी
किस को मिली तस्कीन-ए-साहिल किस ने सर मंजधार किया
ज़हीर काश्मीरी
इश्क़ जब तक न आस-पास रहा
ज़हीर काश्मीरी
इश्क़ इक हिकायत है सरफ़रोश दुनिया की
ज़हीर काश्मीरी
इस दौर-ए-आफ़ियत में ये क्या हो गया हमें
ज़हीर काश्मीरी
हिज्र ओ विसाल की सर्दी गर्मी सहता है
ज़हीर काश्मीरी
हवा-ए-हिज्र चली दिल की रेगज़ारों में
ज़हीर काश्मीरी
हर रोज़ ही इमरोज़ को फ़र्दा न करोगे
ज़हीर काश्मीरी
हमराह लुत्फ़-ए-चश्म-ए-गुरेज़ाँ भी आएगी
ज़हीर काश्मीरी
हैं बज़्म-ए-गुल में बपा नौहा-ख़्वानियाँ क्या क्या
ज़हीर काश्मीरी
फ़िराक़-ए-यार के लम्हे गुज़र ही जाएँगे
ज़हीर काश्मीरी
फ़र्ज़ बरसों की इबादत का अदा हो जैसे
ज़हीर काश्मीरी
इक शख़्स रात बंद-ए-क़बा खोलता रहा
ज़हीर काश्मीरी
इक शख़्स रात बंद-ए-क़बा खोलता रहा
ज़हीर काश्मीरी