Ghazal Poetry (page 28)

मारा हमें इस दौर की आसाँ-तलबी ने

ज़ाहिदा ज़ैदी

कहाँ तक काविश-ए-इसबात-ए-पैहम

ज़ाहिदा ज़ैदी

दिल-ए-फ़सुर्दा को अब ताक़त-ए-क़रार नहीं

ज़ाहिदा ज़ैदी

बू-ए-गुल रक़्स में है बाद-ए-ख़िज़ाँ रक़्स में है

ज़ाहिदा ज़ैदी

हो गए अम्बर-फ़शाँ दोनों-जहाँ मेरे लिए

ज़ाहीदा कमाल

जानती हूँ कि वो ख़फ़ा भी नहीं

ज़ाहीदा हिना

मैं किनारों को रुलाने लगा हूँ

ज़ाहिद शम्सी

किसी मंज़र के पस-मंज़र में जा कर

ज़ाहिद शम्सी

ख़्वाब सितारे होते होंगे लेकिन आँखें रेत

ज़ाहिद शम्सी

आजिज़ी को चलन किए हुए हैं

ज़ाहिद शम्सी

फ़सील-ए-जिस्म गिरा कर बिखर न जाऊँ मैं

ज़ाहिद नवेद

कल रात बहुत ज़ोर था साहिल की हवा में

ज़ाहिद मसूद

अजब क्या है रहे उस पार बहते जुगनुओं की रौशनी तहलील की ज़द में

ज़ाहिद मसूद

ज़ख़्म का जो मरहम होते हैं

ज़ाहिद कमाल

मिज़ाज-ए-शे'र को हर दौर में रहा महबूब

ज़ाहिद कमाल

लाख ऊँची सही ऐ दोस्त किसी की आवाज़

ज़ाहिद कमाल

घर से निकले देर हुई है घर को लौट चलें

ज़ाहिद हसन चुग़ताई

वही लड़की वही लड़का पुराना

ज़ाहिद फ़ारानी

उसी की धुन में कहीं नक़्श पा गया है मिरा

ज़ाहिद फ़ारानी

तीरा-ओ-तार ज़मीनों के उजाले दरिया

ज़ाहिद फ़ारानी

सितारे चुप हैं कि नग़्मा-सरा समुंदर है

ज़ाहिद फ़ारानी

ख़ुश्क लम्हात के दरिया में बहा दे मुझ को

ज़ाहिद फ़ारानी

कई दिलों में पड़ी इस से शोर-ओ-शर की तरह

ज़ाहिद फ़ारानी

जहान-ए-तंग में तन्हा हुआ मैं

ज़ाहिद फ़ारानी

है मेरे सर से कोई बोझ उतारने वाला

ज़ाहिद फ़ारानी

गाड़ी की खिड़की से देखा शब को उस का शहर

ज़ाहिद फ़ारानी

बिसात-ए-शौक़ के मंज़र बदलते रहते हैं

ज़ाहिद फ़ारानी

मोहब्बत के सफ़र में कोई भी रस्ता नहीं देता

ज़ाहिद फख़री

मैं कि अफ़्सुर्दा मकानों में रहूँ

ज़ाहिद फख़री

ज़ुल्फ़-ए-ख़मदार में नूर-ए-रुख़-ए-ज़ेबा देखो

ज़ाहिद चौधरी