Ghazal Poetry (page 415)
चाहत के अब इफ़शा-कुन-ए-असरार तो हम हैं
नज़ीर अकबराबादी
चाह में उस की दिल ने हमारे नाम को छोड़ा नाम किया
नज़ीर अकबराबादी
बुतों की मज्लिस में शब को मह-रू जो और टुक भी क़याम करता
नज़ीर अकबराबादी
बुतों की काकुलों के देख कर पेच
नज़ीर अकबराबादी
भरे हैं उस परी में अब तो यारो सर-ब-सर मोती
नज़ीर अकबराबादी
बेजा है रह-ए-इश्क़ में ऐ दिल गिला-ए-पा
नज़ीर अकबराबादी
बज़्म-ए-तरब वक़्त-ए-ऐश साक़ी ओ नक़्ल ओ शराब
नज़ीर अकबराबादी
बना है अपने आलम में वो कुछ आलम जवानी का
नज़ीर अकबराबादी
बैठो याँ भी कोई पल क्या होगा
नज़ीर अकबराबादी
बैठे हैं अब तो हम भी बोलोगे तुम न जब तक
नज़ीर अकबराबादी
बहर-ए-हस्ती में सोहबत-ए-अहबाब
नज़ीर अकबराबादी
बगूले उठ चले थे और न थी कुछ देर आँधी में
नज़ीर अकबराबादी
अय्याम-ए-शबाब अपने भी क्या ऐश-असर थे
नज़ीर अकबराबादी
अव्वलन उस बे-निशाँ और बा-निशाँ को इश्क़ है
नज़ीर अकबराबादी
अंदाज़ कुछ और नाज़-ओ-अदा और ही कुछ है
नज़ीर अकबराबादी
अल्ताफ़ बयाँ हों कब हम से ऐ जान तुम्हारी सूरत के
नज़ीर अकबराबादी
ऐश कर ख़ूबाँ में ऐ दिल शादमानी फिर कहाँ
नज़ीर अकबराबादी
ऐ सफ़-ए-मिज़्गाँ तकल्लुफ़ बर-तरफ़
नज़ीर अकबराबादी
ऐ मिरी जान हमेशा हो तिरी जान की ख़ैर
नज़ीर अकबराबादी
ऐ दिल अपनी तू चाह पर मत फूल
नज़ीर अकबराबादी
अगर है मंज़ूर ये कि होवे हमारे सीने का दाग़ ठंडा
नज़ीर अकबराबादी
अदा-ओ-नाज़ में कुछ कुछ जो होश उस ने सँभाला है
नज़ीर अकबराबादी
अदा के तौसन पर उस सनम को जो आज हम ने सवार देखा
नज़ीर अकबराबादी
आया नहीं जो कर कर इक़रार हँसते हँसते
नज़ीर अकबराबादी
आन रखता है अजब यार का लड़ कर चलना
नज़ीर अकबराबादी
आज तो हमदम अज़्म है ये कुछ हम भी रस्मी काम करें
नज़ीर अकबराबादी
आग़ोश-ए-तसव्वुर में जब मैं ने उसे मस़्का
नज़ीर अकबराबादी
उन के जब जब भी मिरे नाम लिफ़ाफ़े आए
नज़र सिद्दीक़ी
छोड़ कर अपनी ज़मीं अपना समुंदर साईं
नज़र सिद्दीक़ी
वार हर एक मिरे ज़ख़्म का हामिल आया
नज़र जावेद