Ghazal Poetry (page 443)

फूलों को अपने पाँव से ठुकराए जाते हैं

नादिर लखनवी

कोई परी हो अगर हम-कनार होली में

नादिर लखनवी

दिल मुझे कुफ़्र आश्ना न करे

नादिर लखनवी

दिल आँखों से आशिक़ बचाए हुए हैं

नादिर लखनवी

ऐ बुत हैं हुस्न में तिरी मशहूर पिंडलियाँ

नादिर लखनवी

शिकायत कर के ग़ुस्सा और उन का तेज़ करना है

नादिर काकोरवी

फेर लेता है मुकद्दर हो के मुँह जिस से कहें

नादिर काकोरवी

अब न हसरत न पास है दिल में

नादिर काकोरवी

तुम्हारे जाने का हम को मलाल थोड़ी है

नादिम नदीम

सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले

नादिम नदीम

क्या ख़बर किस को कब कहाँ दे दे

नादिम नदीम

कई दिन से कोई हिचकी नहीं है

नादिम नदीम

हम जो दीवार पे तस्वीर बनाने लग जाएँ

नादिम नदीम

ग़ौर से मुझ को देखता है क्या

नादिम नदीम

छू सुकूँ तुझ को ये औक़ात कभी तो होगी

नादिम नदीम

ज़िंदा रहने की तलब इस लिए प्यारी न रही

नदीम सिरसीवी

सुरूर से अटे हुए ऐ मौसम-ए-विसाल रुक

नदीम सिरसीवी

शुऊर-ए-इश्क़ मिले रू-ए-दार रक़्स करूँ

नदीम सिरसीवी

सराब-ए-दिल से मुसलसल फ़रेब खा रहा हूँ

नदीम सिरसीवी

रियाज़तों की तपिश में रह कर पिघल रहा हूँ

नदीम सिरसीवी

मुस्तक़िल महव-ए-ग़म-ए-अहद-ए-गुज़िश्ता होना

नदीम सिरसीवी

मेरे कश्कोल में बस सिक्का-ए-रद है हद है

नदीम सिरसीवी

जैसे हों लाशें दफ़्न पुराने खंडर की बुनियाद तले

नदीम सिरसीवी

जब बढ़ा दर्द की मौजों का दबाव साहब

नदीम सिरसीवी

गिरफ़्त-ए-कर्ब से आज़ाद ऐ दिल हो ही जाऊँगा

नदीम सिरसीवी

इक ज़मीं-दोज़ आसमाँ हूँ मैं

नदीम सिरसीवी

एक हम ही नहीं तक़दीर के मारे साहब

नदीम सिरसीवी

दोबारा मो'जिज़ा हो जाएगा क्या

नदीम सिरसीवी

बयाज़-ए-कोहना में जिद्दत भरी तहरीर रखनी है

नदीम सिरसीवी

अरसा-ए-ख़्वाब से उठ हल्क़ा-ए-ता'बीर में आ

नदीम सिरसीवी