Ghazal Poetry (page 475)

जो मुझ से दूर जाना चाहता था

मुंतज़िर फ़िरोज़ाबादी

जो चेहरे की बनावट से यूँ ज़ुल्फ़ों को हटाती हो

मुंतज़िर फ़िरोज़ाबादी

ज़ब्त से दिल नज़ार रहता है

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

वो तग़ाफ़ुल को इलाज-ए-ग़म-ए-पिन्हाँ समझा

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

पस-ए-तौबा हदीस-ए-मुतरिब-ओ-पैमाना कहते हैं

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

मुजस्सम दाग़-ए-हसरत हूँ सरापा नक़्श-ए-इबरत का

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

मअनी-तराज़-ए-इश्क़ हर इक बादा-ख़्वार था

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

कोई मुझ सा मुस्तहिक़्क़-ए-रहम-ओ-ग़म-ख़्वारी नहीं

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

कोई अरमाँ तलाश-ए-दोस्त का क्यूँ दिल में रह जाता

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

कारोबार-ए-इश्क़ की कसरत कभी ऐसी न थी

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

हाथ रखते ही था हाल-ए-क़ल्ब-ए-मुज़्तर आईना

मुंशी नौबत राय नज़र लखनवी

उस बुत को दिल दिखा के कलेजा दिखा दिया

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

नीम-जाँ हूँ ज़िंदगी दूद-ए-चराग़-ए-कुश्ता है

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

मिसरे पे उन के मिस्रा-ए-क़द का गुमाँ हुआ

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

मज़मून-ए-इश्क़ ज़ेहन-ए-सितमगर में आ गया

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

हो अगर मद्द-ए-नज़र गुलशन में ऐ गुलफ़ाम रक़्स

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

गर तअ'ल्ली पर है वहम-ए-इम्तिहान-ए-मय-फ़रोश

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

दिखा ऐ नाख़ुन-ए-ग़म लुत्फ़-ए-बाहम ऐसे सामाँ पर

मुंशी खैराती लाल शगुफ़्ता

ज़ीनत-ए-उनवाँ है मज़मूँ आलम-ए-तौहीद का

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

वस्ल से तब भरे हमारा पेट

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

सुब्हा से मतलब न कुछ ज़ुन्नार से

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

सर मिला है इश्क़ का सौदा समाने के लिए

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

क़ातिल के कूचे में हमा-तन जाऊँ बन के पाँव

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

फल है उस बुत की आश्नाई का

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

कुछ ग़रज़ वज्ह मुद्दआ बाइस

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

कहें क्या कि क्या क्या सितम देखते हैं

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

ईजाद ग़म हुआ दिल-ए-मुज़्तर के वास्ते

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

होश-ओ-शकेब-ओ-ताब-ओ-सब्र-ओ-क़रार पांचों

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

दिल तंग उस में रंज-ओ-अलम शोर-ओ-शर हों जम्अ'

मुंशी देबी प्रसाद सहर बदायुनी

तुम को अगर हमारी मोहब्बत नहीं रही

मुंशी बिहारी लाल मुश्ताक़ देहलवी