Ghazal Poetry (page 483)

अच्छा हुआ कि मेरा नशा भी उतर गया

मुनव्वर राना

आप को चेहरे से भी बीमार होना चाहिए

मुनव्वर राना

सरफ़रोशों के चले लश्कर पे लश्कर देखिए

मुनव्वर लखनवी

किसी सूरत से हो जाता है सामान-ए-सफ़र पैदा

मुनव्वर लखनवी

जाम लेते हैं न पीने को सुबू लेते हैं

मुनव्वर लखनवी

हज़ार शुक्र कि अंदेशा-ए-मआल गया

मुनव्वर लखनवी

है सोज़-ए-ग़म को गर्मी-ए-बाज़ार की तलाश

मुनव्वर लखनवी

हद-ए-इम्काँ से आगे अपनी हैरानी नहीं जाती

मुनव्वर लखनवी

नज़र अज़ाबों में घिर गई है सुख़न सराबों में आ गया है

मुनव्वर जमील

सर उठाएगी अगर रस्म-ए-जफ़ा मेरे बा'द

मुनव्वर हाशमी

सब की आवाज़ में आवाज़ मिला रक्खी है

मुनव्वर हाशमी

रोज़ गिरे इक ख़्वाब-ए-इमारत मलबे में दब जाऊँ

मुनव्वर हाशमी

मेहनत कोशिश और वफ़ा के ख़ूगर ज़िंदा रहते हैं

मुनव्वर हाशमी

लूट कर वो आ नहीं सकता कभी सोचा नहीं

मुनव्वर हाशमी

कुछ इस तरह से बसर की है ज़िंदगी मैं ने

मुनव्वर हाशमी

ख़याल-ओ-ख़्वाब की दुनिया से हम गुज़र भी गए

मुनव्वर हाशमी

जहाँ बचपन गुज़ारा था वो घर पहचानते हैं

मुनव्वर हाशमी

जब ज़माने में फ़क़त अफ़्सुर्दगी रह जाएगी

मुनव्वर हाशमी

इश्क़ का ए'तिबार हैं हम लोग

मुनव्वर हाशमी

हम अपनी जागती आँखों में ख़्वाब ले के चले

मुनव्वर हाशमी

हमारे हक़ में कोई इंक़लाब है कि नहीं

मुनव्वर हाशमी

एक ही मसअला ता-उम्र मिरा हल न हुआ

मुनव्वर हाशमी

इक ऐसा मोड़ सर-ए-रहगुज़र भी आएगा

मुनव्वर हाशमी

दिल में तेरे ख़याल की ख़ुश्बू

मुनव्वर हाशमी

चश्म-ए-आहू और है इस की कहानी और है

मुनव्वर हाशमी

चाँद की रानाइयों में राज़ ये मस्तूर है

मुनव्वर हाशमी

और कोई भी नहीं अपना सहारा बाक़ी

मुनव्वर हाशमी

अगरचे मौत को हम ने गले लगाया नहीं

मुनव्वर हाशमी

उसे भी हाथ मलते देखना है

मुनव्वर अज़ीज़

इस्म सारे भूल बैठा शो'बदा-गर किस तरह

मुनव्वर अज़ीज़