Ghazal Poetry (page 484)
देर तक इक साया-ए-अब्र गुमाँ देखा हुआ
मुनव्वर अज़ीज़
बिखेरूँ रंग ख़ुशबू को मसल दूँ
मुनव्वर अज़ीज़
अभी रुत को बदलते देखना है
मुनव्वर अज़ीज़
आइना भी आइना-गर से उलझता रह गया
मुनव्वर अज़ीज़
आइना भी आईना-गर से उलझता रह गया
मुनव्वर अज़ीज़
ये कौन सा परवाना मुआ जल के लगन में
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
वो मेरा दर्द-ए-दिल क्या जानते हैं
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
तेग़-ए-पुर-ख़ूँ वो अगर धोए कनार-ए-दरिया
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
शाना तो छुटा ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ से उलझ कर
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
निगाह-ए-यार हम से आज बे-तक़सीर फिरती है
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
न पूछ हिज्र में जो कुछ हुआ हमारा हाल
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
मरते दम ओ बेवफ़ा देखा तुझे
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
क्यूँकर ये तुफ़-ए-अश्क से मिज़्गाँ में लगी आग
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
किसी के मैं लिबास-ए-आरियत को क्या समझता हूँ
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
किस तरह नाला करे बुलबुल चमन की याद में
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
जलवा-ए-बर्क़-ए-कम-नुमा हैं हम
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
हम फ़क़ीरों का सुने गर ज़िक्र-ए-अर्रा फ़ाख़्ता
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
हर उ'ज़्व-ए-बदन एक से है एक तिरा ख़ूब
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
हर कोई उस का ख़रीदार हुआ चाहता है
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
है कौन शय जिस की ज़िद नहीं है जहाँ ख़ुशी है मलाल भी है
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
गिल है आरिज़ तो क़द्द-ए-यार दरख़्त
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
चशम-ए-ख़ूँबार सा बरसे न कभू पानी एक
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
आ के सज्जादा-नशीं क़ैस हुआ मेरे बा'द
मुनव्वर ख़ान ग़ाफ़िल
वक़्त-ए-मायूसी है कोई आसरा बाक़ी रहे
मुमताज़ राशिद
थकन के साथ बढ़ा हल्क़ा-ए-नज़र मेरा
मुमताज़ राशिद
सीने का बोझ अश्कों में ढलते हुए भी देख
मुमताज़ राशिद
शिकस्ता लम्हों का तू वक़्त को हिसाब न दे
मुमताज़ राशिद
शिकस्ता छत न सही आसमान रहने दे
मुमताज़ राशिद
सकूँ मिला है मगर इज़्तिराब जैसा है
मुमताज़ राशिद
सैल-ए-ख़ूँ पैकर-ए-अशआ'र में ढलता ही नहीं
मुमताज़ राशिद