Ghazal Poetry (page 507)

तू नहीं तो ज़िंदगी आज़ार है तेरे बग़ैर

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

शुऊ'र-ए-होश से बेगाना कह दिया होता

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

निगाह-ए-अहल-ए-जहाँ में शिकस्ता-हाल हूँ मैं

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

नज़्ज़ारा-ए-निगाह का उनवाँ बदल गया

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

कहाँ ये ओस नहीं आफ़्ताब की ज़द में

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

जाने क्या चेहरे की अब हालत हुई

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

हुई है उम्र कि ख़ुर्शीद से नज़र न मिली

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

फ़ज़ा ख़मोश ज़मीन दंग आसमाँ चुप है

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

आख़िरी हिचकी पे है नश्शे की साग़र जागा

मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी

बीत गया है प्यार का मौसम घर घर सहरा जैसा है

मोहम्मद सालिम

झटक के चल नहीं सकता हूँ तेरे ध्यान को मैं

मोहम्मद सलीम ताहिर

वो आँख अजब रौ में बहा ले गई हम को

मोहम्मद सलीम साग़र

जिस की आँखों में कोई रंग-ए-शनासाई न था

मोहम्मद सज्जाद मिर्ज़ा

याद है आह का वो रंग-ए-नवा हो जाना

मोहम्मद सादिक़ ज़िया

पर्दा-ए-साज़ में भी सोज़ का हामिल होना

मोहम्मद सादिक़ ज़िया

कोई ये 'इक़बाल' से जा कर ज़रा पूछे 'ज़िया'

मोहम्मद सादिक़ ज़िया

ख़याल नुत्क़ से बेगाना हो तो क्या कहिए

मोहम्मद सादिक़ ज़िया

हामिल-ए-अज़्मत-ए-फ़ितरत दिल-ए-इंसाँ निकला

मोहम्मद सादिक़ ज़िया

आज अपने दिल से फिर उलझा हूँ मैं

मोहम्मद सादिक़ ज़िया

फ़लक पे जितने हैं तारे शुमार से बाहर

मोहम्मद नवेद मिर्ज़ा

निगाह-ए-लुत्फ़ से तेरी कहीं जो हम मिलते

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

न तेशा हम ने देखा है न जू-ए-शीर देखी है

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

न सर-निगूँ न ब-ज़ाहिर उदास उदास चले

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

ख़ुदाया काश तुझी को गवाह कर लेते

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

हुस्न और इश्क़ को फ़र्क़-ए-नज़री क्यूँ कहिए

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

गो ज़बानें लाख हों दिल की सदा तो एक है

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

बे-ख़ुदी में जब तिरी महफ़िल में दीवाने गए

मोहम्मद नक़ी रिज़वी असर

दिलों से दर्द दुआ से असर निकलता है

मोहम्मद मुख़तार अली

ज़ीस्त में रंग भर गई आख़िर

मोहम्मद मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा

यूँ तो यूसुफ़ से हसीं और जवाँ थे पहले

मोहम्मद मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा