Ghazal Poetry (page 505)

लाख जल्वे हैं निगाहों में नज़ारों की तरह

मोहन जाविदानी

कौन जाने कितनी बाक़ी किस के पैमाने में है

मोहन जाविदानी

तुझ को ख़ुद अपने ही साए पे गुमाँ गुज़रा है

मोहम्मद नबी ख़ाँ जमाल सुवेदा

तेरे जल्वे से मिरे दिल का फ़रोज़ाँ होना

मोहम्मद नबी ख़ाँ जमाल सुवेदा

निगाह-ए-नाज़ का रिश्ता जो दिल के घाव से है

मोहम्मद नबी ख़ाँ जमाल सुवेदा

कोई मंज़िल न कोई जादा है

मोहम्मद नबी ख़ाँ जमाल सुवेदा

इश्क़ की जन्नत दार के पीछे

मोहम्मद नबी ख़ाँ जमाल सुवेदा

असीरी में तबाही रौनक़-ए-काशाना हो जाए

मोहम्मद ज़करिय्या ख़ान

तारे खिले हुए हैं शब-ए-माहताब है

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

रंज पर रंज मुसीबत सी मुसीबत देखी

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

न मुरव्वत है न उल्फ़त न वफ़ा मेरे बा'द

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

न आती थी कहीं दिल में नज़र आग

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

हुस्न अच्छा है मोहम्मद का कमाल अच्छा है

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

हश्र में और ही आसार नज़र आते हैं

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

घड़ी भर रंग निखरा सूरत-ए-गुल-हा-ए-तर मेरा

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

दुनिया में कोई रंज से बढ़ कर ख़ुशी नहीं

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

दिल-ए-शैदा की हक़ीक़त मिरे मौला क्या है

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

दिल-ए-नालाँ तिरी आहों में असर है कि नहीं

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

दिल में जो तसव्वुर है तिरी ज़ुल्फ़-ए-रसा का

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

आ गया ज़ुल्फ़ के दम में दिल-ए-नादाँ अपना

मोहम्मद यूसुफ़ रासिख़

वा'दा गर रोज़ किए जाइएगा

मोहम्मद यूसुफ़ अली ख़ाँ नाज़िम रामपुरी

था ज़ुलेख़ा को जो जाँ से मह-ए-कनआ'न अज़ीज़

मोहम्मद यार ख़ाकसार

वो कज-कुलह जो कभी संग-बार गुज़रा था

मोहम्मद याक़ूब आसी

मैं ही दीवाना सही लोग तो फ़रज़ाने हैं

मोहम्मद याक़ूब आसी

जाने चली है कैसी हवा सारे शहर में

मोहम्मद याक़ूब आसी

हुजूम-ए-ग़म से मसर्रत कशीद करते हैं

मोहम्मद याक़ूब आसी

ग़म हज़ारों दिल-ए-हज़ीं तन्हा

मोहम्मद याक़ूब आसी

अपने दुश्मन हज़ार निकले हैं

मोहम्मद याक़ूब आसी

आओ कुछ ज़िक्र-ए-रोज़गार करें

मोहम्मद याक़ूब आसी

आदमी को वक़ार मिल जाए

मोहम्मद याक़ूब आसी