Ghazal Poetry (page 506)
रिंद बेताब हैं घनघोर घटा छाई है
मोहम्मद विलायतुल्लाह
राज़ अपना जो कह दिया तू ने
मोहम्मद विलायतुल्लाह
मिरे सीने से रंज-ओ-ग़म की तुग़्यानी नहीं जाती
मोहम्मद विलायतुल्लाह
मकाँ मेरा अज़ल से ढूँढती फिरती थी वीरानी
मोहम्मद विलायतुल्लाह
हर-वक़्त उलझता है ये दिल ज़ुल्फ़-ए-दोता में
मोहम्मद विलायतुल्लाह
हमारी आज-कल हिम्मत फ़क़त आह-ओ-फ़ुग़ाँ तक है
मोहम्मद विलायतुल्लाह
दिल में मेरे हर घड़ी दरिया-ए-ग़म लबरेज़ है
मोहम्मद विलायतुल्लाह
डरता हूँ अर्ज़-ए-हाल से धोका न हो कहीं
मोहम्मद विलायतुल्लाह
बाक़ी है ताब-ए-ज़ब्त न ताक़त फ़ुग़ाँ की है
मोहम्मद विलायतुल्लाह
बात तुम्हारी आज तक कोई हुई है कब ग़लत
मोहम्मद विलायतुल्लाह
आश्ना-ए-दर्द तू ऐ ख़ूगर-ए-इशरत नहीं
मोहम्मद विलायतुल्लाह
ये मोहब्बत का सिला था इश्क़ का अंजाम था
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
तसव्वुर में ये कौन आया ज़बाँ पर किस का नाम आया
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
रह गई वो निगाह-ए-नाज़ क़ल्ब ओ जिगर में बैठ कर
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
फूलों की चाँद तारों की महफ़िल फ़रेब है
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
मुझ पर तिरी नज़रों का जो एहसाँ नहीं होता
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
काँटों पे चल रहा हूँ मोहब्बत की राह में
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
कमाल-ए-इश्क़ में सोज़-ए-निहाँ बाक़ी नहीं रहता
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
इसी सूरत से तस्कीन-ए-दिल-ए-नाशाद करते हैं
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
हुस्न-ओ-उलफ़त साथ हैं आग़ाज़ से अंजाम तक
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
हुस्न की जितनी बढ़ीं रानाइयाँ
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
हिज्र की बे-ताबियाँ थीं हसरतों का जोश था
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
देखा था किस नज़र से तुम ने हँसी हँसी में
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
बाक़ी है वही शोख़ी-ए-गुफ़्तार अभी तक
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
बहर-ए-हस्ती से भी जी घबरा गया
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
बहर-ए-हस्ती से भी जी घबरा गया
मोहम्मद उस्मान आरिफ़
वार भरपूर किया उस ने अना पर मेरी
मोहम्मद तन्वीरुज़्ज़मां
अब्र बरसा है न जाने किस लिए
मोहम्मद तन्वीरुज़्ज़मां
लड़ी इस ठाट से मनकूहा-ए-काफ़िर-बयाँ मेरी
मोहम्मद ताहा खान
ये फ़स्ल-ए-गुल है गरेबाँ के तार की हद तक
मोहम्मद सिद्दीक़ साइब टोंकी