Ghazal Poetry (page 509)

सुनहरी नींद से किस ने मुझे बेदार कर डाला

मोहम्मद इज़हारुल हक़

क़िर्तास ओ क़लम हाथ में है और शब-ए-मह है

मोहम्मद इज़हारुल हक़

पड़े हुए हैं मिरे जिस्म ओ जाँ मिरे पीछे

मोहम्मद इज़हारुल हक़

नमक इन आँसुओं में कम न था पर नम बहुत अच्छा

मोहम्मद इज़हारुल हक़

नजात के लिए रोज़-ए-सियाह माँगती है

मोहम्मद इज़हारुल हक़

मता-ए-बे-बहा आँसू ज़मीं में बो दिया था

मोहम्मद इज़हारुल हक़

लहू में क्या बताएँ रौशनी कैसी मिली थी

मोहम्मद इज़हारुल हक़

कोई ज़ारी सुनी नहीं जाती कोई जुर्म मुआफ़ नहीं होता

मोहम्मद इज़हारुल हक़

किसी तारीक गोशे में बसर होगी हमारी

मोहम्मद इज़हारुल हक़

किसी तारीक गोशे में बसर होगी हमारी

मोहम्मद इज़हारुल हक़

ख़िज़ाँ तुझ पर ये कैसा बर्ग-ओ-बार आने लगा है

मोहम्मद इज़हारुल हक़

जिहाद-ए-इश्क़ में हम आशिक़ों को वार देना

मोहम्मद इज़हारुल हक़

इसी दुनिया में दुनियाएँ हमारी भी बसी हैं

मोहम्मद इज़हारुल हक़

हमारे सर पे कोई हाथ था न साया था

मोहम्मद इज़हारुल हक़

इक खुला मैदाँ तमाशा-गाह के उस पार है

मोहम्मद इज़हारुल हक़

एक चराग़ यहाँ मेरा है एक दिया वहाँ तेरा

मोहम्मद इज़हारुल हक़

दश्त-नवर्दी में कोई सात था

मोहम्मद इज़हारुल हक़

बस एक रात मिरे घर में चाँद उतरा था

मोहम्मद इज़हारुल हक़

बरून-ए-दर निकलते ही बहुत घबरा गया हूँ

मोहम्मद इज़हारुल हक़

बहुत से रास्तों में तू ने जो रस्ता चुना था

मोहम्मद इज़हारुल हक़

हम से करते हो बयाँ ग़ैरों की यारी आन कर

मोहम्मद ईसा तन्हा

उस ने लिखा था हर्फ़-ए-जुदाई मिरे लिए

मोहम्मद फ़ीरोज़ शाह

अहद जैसे भी बंधे थे तेरे मेरे दरमियाँ

मोहम्मद फ़ख़रुल हक़ नूरी

जिधर देखिए है क़यामत की दुनिया

मोहम्मद फ़ैज़ुल्लाह फ़ैज़

हो ख़ुशी में तिरी ख़ुशी मेरी

मोहम्मद फ़ैज़ुल्लाह फ़ैज़

हाल-ए-दिल अपना लिखूँ हाल तुम्हारा लिक्खूँ

मोहम्मद फ़ैज़ुल्लाह फ़ैज़

बज़्म से अपनी जो इस तरह उठा देते हैं

मोहम्मद फ़ैज़ुल्लाह फ़ैज़

वो मिले तो बे-तकल्लुफ़ न मिले तो बे-इरादा

मोहम्मद दीन तासीर

शिकवा-ए-बेजा की क्या उन से शिकायत हम करें

मोहम्मद दीन तासीर

मेरी वफ़ाएँ याद करोगे

मोहम्मद दीन तासीर