Ghazal Poetry (page 87)
लम्हा-ए-इमकान को पहलू बदलते देखना
तनवीर अंजुम
किस तरह उस को बुलाऊँ ख़ाना-ए-बर्बाद में
तनवीर अंजुम
कभी वो मिस्ल-ए-गुल मुझे मिसाल-ए-ख़ार चाहिए
तनवीर अंजुम
कभी बहुत है कभी ध्यान तेरा कुछ कम है
तनवीर अंजुम
जचती नहीं कुछ शाही-ओ-इम्लाक नज़र में
तनवीर अंजुम
इज़्हार-ए-जुनूँ बर-सर-ए-बाज़ार हुआ है
तनवीर अंजुम
दुखों के रूप बहुत और सुखों के ख़्वाब बहुत
तनवीर अंजुम
बस्तियाँ तो आसमाँ ले जाएँगे
तनवीर अंजुम
आसमान-ए-यास पर खोया सितारा ढूँढना
तनवीर अंजुम
ज़ेहन ज़िंदा है मगर अपने सवालात के साथ
तनवीर अहमद अल्वी
ये बात दश्त-ए-वफ़ा की नहीं चमन की है
तनवीर अहमद अल्वी
वो रक़्स कहाँ और वो तब-ओ-ताब कहाँ है
तनवीर अहमद अल्वी
वही जो राह का पत्थर था बे-तराश भी था
तनवीर अहमद अल्वी
मिल भी जाता जो आब आब-ए-बक़ा क्या करते
तनवीर अहमद अल्वी
मिरी ग़ज़ल जो नए साज़ से इबारत है
तनवीर अहमद अल्वी
लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है
तनवीर अहमद अल्वी
लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है
तनवीर अहमद अल्वी
क्या ज़रूरी है कोई बे-सबब आज़ार भी हो
तनवीर अहमद अल्वी
ख़्वाब तो ख़्वाब है ता'बीर बदल जाती है
तनवीर अहमद अल्वी
कमंद-ए-हल्क़ा-ए-गुफ़तार तोड़ दी मैं ने
तनवीर अहमद अल्वी
फ़िशार-ए-हुस्न से आग़ोश-ए-तंग महके है
तनवीर अहमद अल्वी
दिल के भूले हुए अफ़्साने बहुत याद आए
तनवीर अहमद अल्वी
दिल है पलकों में सिमट आता है आँसू की तरह
तनवीर अहमद अल्वी
दर्द की लय को बढ़ा दो कि मैं ज़िंदा हूँ अभी
तनवीर अहमद अल्वी
बज़्म-ए-जाँ फिर निगह-ए-तौबा-शिकन माँगे है
तनवीर अहमद अल्वी
अजीब शख़्स है पत्थर से पर बनाता है
तनवीर अहमद अल्वी
अभी तो आँखों में ना-दीदा ख़्वाब बाक़ी हैं
तनवीर अहमद अल्वी
जिस्म के अंदर सिसकता कौन है
तन्हा तिम्मापुरी
जलना हो तो मुझ से जल
तन्हा तिम्मापुरी
बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं
तन्हा तिम्मापुरी