Ghazal Poetry (page 86)
अब नए रुख़ से हक़ाएक़ को उलट कर देखो
तारिक़ बट
इक न इक शम् अँधेरे में जलाए रखिए
तारिक़ बदायुनी
रास्ते में आ रहे हैं जो नदी नाले न देख
तनवीर गौहर
मुझे भी नीम के जैसा न कर दे
तनवीर गौहर
माँगने से तो हुकूमत नहीं मिलने वाली
तनवीर गौहर
मैं ने जब जब भी तिरा नाम लिखा काग़ज़ पर
तनवीर गौहर
कोई शिकवा था शिकायत थी गिला था क्या था
तनवीर गौहर
इश्क़ क्या शय है दोस्त क्या कहिए
तनवीर गौहर
दिलों में बुग़्ज़ के ख़ाने न होते
तनवीर गौहर
दरिया में तुग़्यानी है
तनवीर गौहर
चढ़ता सूरज उड़ता बादल बहता दरिया कुछ भी नहीं
तनवीर गौहर
बातिल-ओ-ना-हक़ से उम्मीद-ए-करम करते रहे
तनवीर गौहर
उठा लेता है अपनी एड़ियाँ जब साथ चलता है
तनवीर सिप्रा
ग़मों की धूप में बरगद की छाँव जैसी है
तनवीर सिप्रा
छत की कड़ियाँ जाँच ले दीवार-ओ-दर को देख ले
तनवीर सिप्रा
बेटे को सज़ा दे के अजब हाल हुआ है
तनवीर सिप्रा
आज इतना जलाओ कि पिघल जाए मिरा जिस्म
तनवीर सिप्रा
सूरतों के शहर में रौज़न ही रौज़न देख कर
तनवीर सामानी
सोच का ज़हर न अब शाम-ओ-सहर दे कोई
तनवीर सामानी
रोज़ तब्दील हुआ है मिरे दिल का मौसम
तनवीर सामानी
फेंकें भी ये लिबास बदन का उतार के
तनवीर सामानी
ख़ुद से भी इक बात छुपाया करता हूँ
तनवीर सामानी
दश्त में जो भी है जैसा मिरा देखा हुआ है
तनवीर सामानी
अहबाब हो गए हैं बहुत मुझ से बद-गुमान
तनवीर सामानी
हमारे वास्ते हर आरज़ू काँटों की माला है
तनवीर नक़वी
तिरी चाल धुन तिरी साँस सुर मिरे दिल को आ के सँभाल भी
तनवीर मोनिस
रिदा-ए-संग ओढ़ कर न सो गया हो काँच भी
तनवीर मोनिस
तरीक़ कोई न आया मुझे ज़माने का
तनवीर अंजुम
सूरज सारा शहर डराता रहता है
तनवीर अंजुम
शहरों के सारे जंगल गुंजान हो गए हैं
तनवीर अंजुम