Ghazal Poetry (page 908)

ये हम जो हिज्र में उस का ख़याल बाँधते हैं

अब्बास ताबिश

ये देख मिरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा मिरे आगे

अब्बास ताबिश

ये अजब साअत-ए-रुख़्सत है कि डर लगता है

अब्बास ताबिश

याद कर कर के उसे वक़्त गुज़ारा जाए

अब्बास ताबिश

वो कौन है जो पस-ए-चश्म-ए-तर नहीं आता

अब्बास ताबिश

वो चाँद हो कि चाँद सा चेहरा कोई तो हो

अब्बास ताबिश

वो आने वाला नहीं फिर भी आना चाहता है

अब्बास ताबिश

उस का ख़याल ख़्वाब के दर से निकल गया

अब्बास ताबिश

टूट जाने में खिलौनों की तरह होता है

अब्बास ताबिश

तिलिस्म-ए-ख़्वाब से मेरा बदन पत्थर नहीं होता

अब्बास ताबिश

तेरी रूह में सन्नाटा है और मिरी आवाज़ में चुप

अब्बास ताबिश

तेरी आँखों से अपनी तरफ़ देखना भी अकारत गया

अब्बास ताबिश

तेरे लिए सब छोड़ के तेरा न रहा मैं

अब्बास ताबिश

सुब्ह की पहली किरन पहली नज़र से पहले

अब्बास ताबिश

शिकस्ता-ख़्वाब-ओ-शिकस्ता-पा हूँ मुझे दुआओं में याद रखना

अब्बास ताबिश

शे'र लिखने का फ़ाएदा क्या है

अब्बास ताबिश

शायद किसी बला का था साया दरख़्त पर

अब्बास ताबिश

शाख़ पर फूल फ़लक पर कोई तारा भी नहीं

अब्बास ताबिश

शजर समझ के मिरा एहतिराम करते हैं

अब्बास ताबिश

साँस के शोर को झंकार न समझा जाए

अब्बास ताबिश

साँस के हम-राह शो'ले की लपक आने को है

अब्बास ताबिश

सदा-ए-ज़ात के ऊँचे हिसार में गुम है

अब्बास ताबिश

रम्ज़-गर भी गया रम्ज़-दाँ भी गया

अब्बास ताबिश

रातें गुज़ारने को तिरी रहगुज़र के साथ

अब्बास ताबिश

पस-ए-ग़ुबार मदद माँगते हैं पानी से

अब्बास ताबिश

पस-ए-ग़ुबार भी उड़ता ग़ुबार अपना था

अब्बास ताबिश

परिंदे पूछते हैं तुम ने क्या क़ुसूर किया

अब्बास ताबिश

पाँव पड़ता हुआ रस्ता नहीं देखा जाता

अब्बास ताबिश

पानी आँख में भर कर लाया जा सकता है

अब्बास ताबिश

नींदों का एक आलम-ए-असबाब और है

अब्बास ताबिश