Ghazal Poetry (page 912)
बे-वज्ह नहीं उन का बे-ख़ुद को बुलाना है
अब्बास अली ख़ान बेखुद
ज़र्फ़ है किस में कि वो सारा जहाँ ले कर चले
आज़िम कोहली
थी याद किस दयार की जो आ के यूँ रुला गई
आज़िम कोहली
सुबू उठा मिरे साक़ी कि रात जाती है
आज़िम कोहली
सिलसिले सब रुक गए दिल हाथ से जाता रहा
आज़िम कोहली
नीला अम्बर चाँद सितारे बच्चों की जागीरें हैं
आज़िम कोहली
मिरी यादें भला तुम किस तरह दिल से मिटाओगे
आज़िम कोहली
किधर का था किधर का हो गया हूँ
आज़िम कोहली
ख़याल-ए-यार का जल्वा यहाँ भी था वहाँ भी था
आज़िम कोहली
ख़ाक से थे ख़ाक से ही हो गए
आज़िम कोहली
जो हुआ जैसा हुआ अच्छा हुआ
आज़िम कोहली
जो होगा सब ठीक ही होगा होने दो जो होना है
आज़िम कोहली
जब कभी तुम मेरी जानिब आओगे
आज़िम कोहली
हो सितम कैसा भी अब हालात की शमशीर का
आज़िम कोहली
इक इश्क़ है कि जिस की गली जा रहा हूँ मैं
आज़िम कोहली
एहसास के सूखे पत्ते भी अरमानों की चिंगारी भी
आज़िम कोहली
दूर है मंज़िल तो क्या रस्ता तो है
आज़िम कोहली
दोस्तों की बज़्म में साग़र उठाए जाएँगे
आज़िम कोहली
बहुत अज़ीज़ था आलम वो दिल-फ़िगारी का
आज़िम कोहली
आ कि चाहत वस्ल की फिर से बड़ी पुर-ज़ोर है
आज़िम कोहली
उल्फ़तों का ख़ुदा नहीं हूँ मैं
अातिश इंदौरी
शजर जिस पे मैं रहता हूँ उसे काटा नहीं करता
अातिश इंदौरी
क्या है ऊँचाई मोहब्बत की बताते जाओ
अातिश इंदौरी
काश मैं तुझ सा बेवफ़ा होता
अातिश इंदौरी
इश्क़ से दिल को ऊबा देखा
अातिश इंदौरी
दिल में है क्या अज़ाब कहे तो पता चले
अातिश इंदौरी
दर्द से दिल ने वास्ता रक्खा
अातिश इंदौरी
बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले
अातिश इंदौरी
ज़िंदगी गुज़री मिरी ख़ुश्क शजर की सूरत
अातिश बहावलपुरी
वो मेरे क़ल्ब को छेदेगा कब गुमान में था
अातिश बहावलपुरी