Bewafa Poetry (page 15)
ख़ुद से इंकार को हम-ज़ाद किया है मैं ने
फ़रहत एहसास
खो बैठी है सारे ख़द-ओ-ख़ाल अपनी ये दुनिया
फ़रहान सालिम
तक़ाज़ा
फ़रीद इशरती
कुछ उन की जफ़ा उन का सितम याद नहीं है
फ़रीद इशरती
शिकायत हम नहीं करते रिआ'यत वो नहीं करते
फ़रह इक़बाल
रोज़-ए-जज़ा गिला तो क्या शुक्र-ए-सितम ही बन पड़ा
फ़ानी बदायुनी
करम-ए-बे-हिसाब चाहा था
फ़ानी बदायुनी
हिज्र में मुस्कुराए जा दिल में उसे तलाश कर
फ़ानी बदायुनी
ज़बाँ मुद्दआ-आश्ना चाहता हूँ
फ़ानी बदायुनी
याँ होश से बे-ज़ार हुआ भी नहीं जाता
फ़ानी बदायुनी
वाहिमे की ये मश्क़-ए-पैहम क्या
फ़ानी बदायुनी
वादी-ए-शौक़ में वारफ़्ता-ए-रफ़्तार हैं हम
फ़ानी बदायुनी
सितम-ईजाद रहोगे सितम-ईजाद रहे
फ़ानी बदायुनी
शबाब-ए-होश कि फ़िल-जुमला यादगार हुई
फ़ानी बदायुनी
रह जाए या बला से ये जान रह न जाए
फ़ानी बदायुनी
क़तरा दरिया-ए-आश्नाई है
फ़ानी बदायुनी
मुझ को मिरे नसीब ने रोज़-ए-अज़ल से क्या दिया
फ़ानी बदायुनी
लुत्फ़ ओ करम के पुतले हो अब क़हर ओ सितम का नाम नहीं
फ़ानी बदायुनी
कूचा-ए-जानाँ में जा निकले जो ग़िल्माँ भूल कर
फ़ानी बदायुनी
हर घड़ी इंक़लाब में गुज़री
फ़ानी बदायुनी
गुज़र गया इंतिज़ार हद से ये वादा-ए-ना-तमाम कब तक
फ़ानी बदायुनी
दिल की तरफ़ हिजाब-ए-तकल्लुफ़ उठा के देख
फ़ानी बदायुनी
दैर में या हरम में गुज़रेगी
फ़ानी बदायुनी
ऐ मौत तुझ पे उम्र-ए-अबद का मदार है
फ़ानी बदायुनी
अब लब पे वो हंगामा-ए-फ़रियाद नहीं है
फ़ानी बदायुनी
हुस्न का एक आह ने चेहरा निढाल कर दिया
फ़ना निज़ामी कानपुरी
वो और होंगे जिन को हरम की तलाश है
फ़ना बुलंदशहरी
हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा
फ़ना बुलंदशहरी
दिल बुतों पे निसार करते हैं
फ़ना बुलंदशहरी
ग़म-ए-जानाँ के सिवा कुछ हमें प्यारा न हुआ
फ़ैज़ी निज़ाम पुरी