Bewafa Poetry (page 14)

उस की गली में ज़र्फ़ से बढ़ कर मिला मुझे

फ़व्वाद अहमद

क्यूँ मसाफ़त में न आए याद अपना घर मुझे

फ़ौक़ लुधियानवी

हमीं पे ख़त्म हैं जौर-ओ-सितम ज़माने के

फ़सीह अकमल

प्यार जादू है किसी दिल में उतर जाएगा

फ़सीह अकमल

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है

फ़सीह अकमल

किसी के सामने इस तरह सुर्ख़-रू होगी

फ़सीह अकमल

सफ़-ए-मातम पे जो हम नाचने गाने लग जाएँ

फ़रताश सय्यद

मैं अपने दिल की तरह आइना बना हुआ हूँ

फ़रताश सय्यद

तन्हा छोड़ के जाने वाले इक दिन पछताओगे

फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी

कुश्तगान-ए-ख़ंजर-ए-तस्लीम-रा

फर्रुख यार

किसी बहाने भी दिल से अलम नहीं जाता

फ़र्रुख़ जाफ़री

तेरी मर्ज़ी न दे सबात मुझे

फ़ारूक़ नाज़की

जो रहा यूँ ही सलामत मिरा जज़्ब-ए-वालहाना

फ़ारूक़ बाँसपारी

दिल-ए-ईज़ा-तलब ले तेरा कहना कर लिया मैं ने

फ़ारूक़ बाँसपारी

मशवरा किस ने दिया था कि मसीहाई कर

फ़ारूक़ बख़्शी

जो बैठो सोचने हर ज़ख़्म-ए-दिल कसकता है

फ़ारूक़ अंजुम

इस क़दर महव-ए-तसव्वुर हूँ सितमगर तेरा

फ़रोग़ हैदराबादी

दिल नहीं मिलने का फिर मेरा सितमगर टूट कर

फ़रोग़ हैदराबादी

वो ख़ुदा है तो भला उस से शिकायत कैसी?

फरीहा नक़वी

वो अगर अब भी कोई अहद निभाना चाहे

फरीहा नक़वी

उसे भूलने का सितम कर रहे हैं

फरीहा नक़वी

मैं कि अब तेरी ही दीवार का इक साया हूँ

फ़ारिग़ बुख़ारी

जंगल उगा था हद्द-ए-नज़र तक सदाओं का

फ़ारिग़ बुख़ारी

हुए हैं सर्द दिमाग़ों के दहके दहके अलाव

फ़ारिग़ बुख़ारी

मैं अपने-आप से बरहम था वो ख़फ़ा मुझ से

फ़रहत शहज़ाद

ये फुर्क़तों में लम्हा-ए-विसाल कैसे आ गया

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मोहब्बत का ये रुख़ देखा नहीं था

फ़रहत नदीम हुमायूँ

है वही एक मेरे सिवा और मैं

फ़रहत नदीम हुमायूँ

मेरा दिल-ए-नाशाद जो नाशाद रहेगा

फ़रहत कानपुरी

मुसलसल अश्क-बारी हो रही है

फ़रहत एहसास