Bewafa Poetry (page 13)
रुख़ हवाओं के किसी सम्त हों मंज़र हैं वही
फ़ुज़ैल जाफ़री
वह ज़ुल्म-ओ-सितम ढाए और मुझ से वफ़ा माँगे
फ़िरदौस गयावी
तू याद आया तिरे जौर-ओ-सितम लेकिन न याद आए
फ़िराक़ गोरखपुरी
रोने को तो ज़िंदगी पड़ी है
फ़िराक़ गोरखपुरी
पर्दा-ए-लुत्फ़ में ये ज़ुल्म-ओ-सितम क्या कहिए
फ़िराक़ गोरखपुरी
हम से क्या हो सका मोहब्बत में
फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-अयादत
फ़िराक़ गोरखपुरी
हिण्डोला
फ़िराक़ गोरखपुरी
सितारों से उलझता जा रहा हूँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुनून-ए-कारगर है और मैं हूँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
जिसे लोग कहते हैं तीरगी वही शब हिजाब-ए-सहर भी है
फ़िराक़ गोरखपुरी
अब दौर-ए-आसमाँ है न दौर-ए-हयात है
फ़िराक़ गोरखपुरी
आज भी क़ाफ़िला-ए-इश्क़ रवाँ है कि जो था
फ़िराक़ गोरखपुरी
दिल मिरा शाकी-ए-जफ़ा न हुआ
फ़िगार उन्नावी
आ के हो जा बे-लिबास
फ़ज़्ल ताबिश
फ़रेब-ए-करम इक तो उन का है इस पर
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
तुम्हीं इक नहीं जाँ-सेताँ और भी हैं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
कुछ तो मुझे महबूब तिरा ग़म भी बहुत है
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
ग़मों से खेलते रहना कोई हँसी भी नहीं
फ़ज़्ल अहमद करीम फ़ज़ली
अब कौन जा के साहिब-ए-मिम्बर से ये कहे
फ़ाज़िल जमीली
सफ़ेद-पोशी-ए-दिल का भरम भी रखना है
फ़ाज़िल जमीली
मुझे उदास कर गए हो ख़ुश रहो
फ़ाज़िल जमीली
हम ने किसी की याद में अक्सर शराब पी
फ़ाज़िल जमीली
गुलज़ार में एक फूल भी ख़ंदाँ तो नहीं है
फ़ाज़िल अंसारी
बता ऐ ज़िंदगी तेरे परस्तारों ने क्या पाया
फ़ाज़िल अंसारी
है जो ख़ामोश बुत-ए-होश-रुबा मेरे बाद
फ़ज़ल हुसैन साबिर
अपने लोगों के नाम
फ़य्याजुद्दीन साइब
निकला जो चिलमनों से वो चेहरा आफ़्ताबी
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
मिरे घर की ईंटें चुरा ले गया वो
फ़े सीन एजाज़