ख्वाब Poetry (page 100)
तन्हाई से बचाव की सूरत नहीं करूँ
अहमद कमाल परवाज़ी
हुस्न नजात-दहिन्दा है
अहमद जावेद
एक ख़याल
अहमद जावेद
अन-पढ़ गूँगे का रजज़
अहमद जावेद
मुझ से बड़ा है मेरा हाल
अहमद जावेद
किसी का ध्यान मह-ए-नीम-माह में आया
अहमद जावेद
आँसू की तरह दीदा-ए-पुर-आब में रहना
अहमद जावेद
फ़ीरोज़ी तस्बीह का घेरा हाथ में जल्वा-अफ़्गन था
अहमद जहाँगीर
तुम को मालूम जवानी का मज़ा है कि नहीं
अहमद हुसैन माइल
क्या आई थीं हूरें तिरे घर रात को मेहमाँ
अहमद हुसैन माइल
जलसों में ख़ल्वतों में ख़यालों में ख़्वाब में
अहमद हुसैन माइल
वो पारा हूँ मैं जो आग में हूँ वो बर्क़ हूँ जो सहाब में हूँ
अहमद हुसैन माइल
शब-ए-माह में जो पलंग पर मिरे साथ सोए तो क्या हुए
अहमद हुसैन माइल
मैं ही मतलूब ख़ुद हूँ तू है अबस
अहमद हुसैन माइल
उस के नाम जो मुझे नहीं जानती
अहमद हमेश
रास्ते में शाम का मुक़द्दर होना
अहमद हमेश
मा-बा'द-उत-तबीआत
अहमद हमेश
झोंका
अहमद हमेश
दर-अस्ल ये नज़्म लिखी ही नहीं गई
अहमद हमेश
ये तेरी चाह भी क्या तेरी आरज़ू भी क्या
अहमद हमदानी
कुछ उस को याद करूँ उस का इंतिज़ार करूँ
अहमद हमदानी
ख़याल-ओ-ख़्वाब से घर कब तलक सजाएँ हम
अहमद हमदानी
दिलों को रंज ये कैसा है ये ख़ुशी क्या है
अहमद हमदानी
काफ़िर हूँ सर-फिरा हूँ मुझे मार दीजिए
अहमद फ़रहाद
जब से इक चाँद की चाहत में सितारा हुआ हूँ
अहमद फ़रीद
रात क्या सोए कि बाक़ी उम्र की नींद उड़ गई
अहमद फ़राज़
मैं ने देखा है बहारों में चमन को जलते
अहमद फ़राज़
ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
अहमद फ़राज़
'फ़राज़' तेरे जुनूँ का ख़याल है वर्ना
अहमद फ़राज़
चला था ज़िक्र ज़माने की बेवफ़ाई का
अहमद फ़राज़